अक्टूबर में लगा दें हरी फलियों ये फसल… 75 दिनों में हो जाएंगे मालामाल! मिट्टी भी होगी उपजाऊ

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अक्टूबर में लगा दें हरी फलियों ये फसल… 75 दिनों में हो जाएंगे मालामाल! मिट्टी भी होगी उपजाऊ


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Tips For Pea Cultivation : अगर किसान अक्टूबर में सही समय पर बुवाई करें और वैज्ञानिक तरीके अपनाएं, तो 75 से 90 दिनों में बंपर पैदावार हासिल कर सकते हैं. यह फसल न सिर्फ़ कम लागत में ज़्यादा मुनाफा देती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ाती है, जिससे अगली फसलों का उत्पादन भी दोगुना हो जाता है.

बलिया : रबी सीजन की प्रमुख और लाभदायक फसलों में से एक मटर (Pea) किसानों के लिए सोने पर सुहागा साबित हो सकती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाती है, क्योंकि मटर की जड़ों में मौजूद गांठें वायुमंडलीय नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर करती हैं, जिससे अगली फसलों की पैदावार बेहतर होती है. यह फसल ठंडे मौसम में आसानी से उगाई जा सकती है और इसे बहुत अधिक सिंचाई की भी आवश्यकता नहीं होती, इसलिए सीमित पानी वाले क्षेत्रों के लिए भी उपयुक्त है. मटर जल्दी तैयार होने वाली फसल है जो 75 से 90 दिनों में बाजार के लिए तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को अल्प अवधि में अच्छा लाभ मिलता है.

श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय बलिया के मृदा विज्ञान और कृषि रसायन विभाग के विभाग अध्यक्ष प्रो. डॉ. अशोक कुमार सिंह के अनुसार मटर की बुवाई के लिए 15अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच का समय शानदार होता है. अगर आप अगेती किस्म की मटर लगाना चाहते हैं तो अक्टूबर के पहले पखवाड़े में बुवाई करें, जबकि देर से पकने वाली किस्में नवंबर तक बोई जा सकती हैं. बहुत जल्द या देर से बुवाई करने पर फसल पर कीट और रोगों का असर अधिक हो सकता है, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है.

ऐसे करें तैयारी
मटर की खेती के लिए दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है, जिसमें जल निकास की सुविधा अच्छी हो. खेत की तैयारी के लिए एक गहरी जुताई हल या ट्रैक्टर से करें और दो से तीन बार हैरो चलाएं. इसके बाद खेत को समतल कर लें, ताकि पानी का जमाव न हो. जैविक खेती के लिए प्रति बीघा 2-3 क्विंटल गोबर की खाद मिलाना लाभदायक रहता है.

इतना लगेगा बीज
प्रति बीघा करीब 20-25 किलो बीज की आवश्यकता होती है. बीजों को बोने से पहले राइजोबियम कल्चर और ट्राइकोडर्मा से उपचारित करें, ताकि जड़ रोगों से बचाव हो और पौधे में नाइट्रोजन स्थिरीकरण बेहतर हो. बुवाई लाइन टू लाइन 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर रखें.

कब करें पहली सिंचाई
मटर की फसल को पहली सिंचाई बुवाई के 20-25 दिन बाद करनी चाहिए. इसके बाद फूल आने और दाने बनने के समय दो और सिंचाइयां जरूरी होती हैं. ध्यान रहे कि खेत में पानी जमा न हो, वरना फसल गल सकती है. खरपतवार नियंत्रण के लिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई और आवश्यकता अनुसार कीटनाशक या जैविक उपाय अपनाएं.

mritunjay baghel

मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु…और पढ़ें

मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु… और पढ़ें

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अक्टूबर में लगा दें हरी फलियों ये फसल… 75 दिनों में हो जाएंगे मालामाल!



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