अद्भुत! मेरठ के इस मंदिर में है कल्पवृक्ष, मन्नत की चुनरी बांधते ही मिलता है फल
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक और पौराणिक नगरी मेरठ के सीने में कई रहस्य और गहरी आस्था दबी हुई है. इसी आस्था का एक बड़ा केंद्र है शास्त्री नगर का ‘गोल मंदिर’. फिल्म निर्माता देवी शरण शर्मा के एक दिव्य सपने से लेकर खुदाई में मां भगवती की मूर्ति निकलने तक, इस मंदिर की कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है. आज यहां न केवल भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, बल्कि मंदिर परिसर में स्थित ‘कल्पवृक्ष’ के बारे में मान्यता है कि इसके सामने मांगी गई हर दुआ कुबूल होती है. आइए जानते हैं क्या है इस मंदिर की महिमा और क्यों यहां नवरात्रों में लगती है 1.5 किलोमीटर लंबी लाइन.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक और पौराणिक धरा मेरठ के कण-कण में भक्ति और इतिहास समाया हुआ है. इसी मेरठ के शास्त्री नगर (सेंट्रल मार्केट) में स्थित है ‘गोल मंदिर’, जो न केवल अपनी अनूठी बनावट बल्कि अपनी चमत्कारी मान्यताओं के लिए भी लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है.

मंदिर के ऐतिहासिक पहलुओं की बात की जाए तो 40 वर्षों से निरंतर मंदिर आ रहे श्रद्धालु वीरेंद्र बताते हैं कि इस मंदिर का निर्माण फिल्म निर्माता देवी शरण शर्मा द्वारा कराया गया था. उन्हें एक सपना आया था, जिसमें उन्हें वर्तमान गर्भ गृह वाले स्थान पर एक मूर्ति दिखाई दी थी.

सपने का जिक्र उन्होंने अपने परिवार जनों से किया. इसके बाद उन्होंने खुदाई का निर्णय लिया, तो वहां से मां भगवती की प्राचीन मूर्ति निकली. मुकुट के आकार में गोल होने के कारण इसे ‘गोल मंदिर’ कहा जाने लगा. उसके बाद इस मंदिर का निर्माण कार्य को शुरू कर दिया गया.
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समुद्र मंथन के दौरान भी देखा गया था कि विभिन्न अनमोल रतन के साथ कल्पवृक्ष भी निकाला था. जिसका आपको विभिन्न ऐतिहासिक ग्रंथ में उल्लेख मिलेगा. ऐसे में मान्यता है कि मंदिर परिसर में भी कल्पवृक्ष का पेड़ मौजूद है. जिसके सामने खड़े होकर जो भी मांगो वह मिलता है. ऐसे में जो भी श्रद्धालु मां भगवती के दर्शन कर प्रसाद चढ़ाते हैं उसके बाद में पेड़ के पास भी पूजा अर्चना करते हुए दिखाई देते हैं.

मंदिर की मान्यता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं. जो भी श्रद्धालु यहां विधि विधान के साथ मां भगवती की पूजा अर्चना करते हुए 40 दिन तक निरंतर दीपक जलाते हैं.
ऐसे सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है. साथ ही नवरात्रों के दौरान मां के चरण पादुका के दर्शन भी श्रद्धालुओं को होते हैं.

यहां पर बड़ी संख्या में ऐसे श्रद्धालु भी दिखाई देंगे जो दीपक जलते हैं. इसके साथ ही मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां पर जो भी भक्त चुनरी बांधकर सच्चे मन से मां आदिशक्ति से मांगते हैं. तो उनकी मन्नत पूरी हो जाती है उसके बाद वह अपनी चुनरी खोलते हुए भी दिखाई देते हैं.

बताते चले कि नवरात्रों के दौरान गोल मंदिर में दर्शन करने के प्रति भक्तों में इतनी जिज्ञासा और श्रद्धा देखने को मिलती है, लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबी लाइन लगती है. लेकिन सभी भक्त अपनी बारी का इंतजार करते हुए दिखाई देते हैं. ऐसे में जो भी से भक्त मां आदिशक्ति के दर्शन करना चाहते हैं. वह सभी मेरठ के सेंट्रल मार्केट के नजदीकी शास्त्री नगर स्थित गोल मंदिर में मां भगवती के दर्शन कर सकते हैं.

वर्तमान समय में यहां पर भगवान शिव परिवार की भी स्थापना की गई है. इसके साथ ही भविष्य में खाटू श्याम, राम दरबार, बालाजी एवं अन्य मूर्ति की स्थापना को लेकर भी कार्य चल रहा है. जिससे कि जो भी श्रद्धालु विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करना चाहे. वह सभी कर सके. क्योंकि यह मंदिर परिसर अब भक्तों के लिए बेहद आस्था का केंद्र बन चुका है.