अयोध्या का इकलौता मंदिर, जहां भगवान राम के विराट स्वरूप में होते हैं दर्शन

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अयोध्या का इकलौता मंदिर, जहां भगवान राम के विराट स्वरूप में होते हैं दर्शन


अयोध्या: प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या में हजारों मंदिर हैं और हर मंदिर की अपनी अलग आस्था, परंपरा और मान्यता है. इन्हीं प्राचीन और विशेष मंदिरों में एक है विश्व विराट विजय राघव मंदिर. यह मंदिर भगवान श्रीराम के विराट स्वरूप के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखता है. माना जाता है कि अयोध्या में यह इकलौता मंदिर है जहां भगवान राम विराट रूप में विराजमान हैं और भक्त उनके इस दिव्य स्वरूप के दर्शन करते हैं.

सैकड़ों साल पुराना बताया जाता है इतिहास

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विश्व विराट विजय राघव मंदिर का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना माना जाता है. समय के साथ मंदिर का कई बार जीर्णोद्धार और पुनर्निर्माण किया गया, जिससे इसकी भव्यता लगातार बढ़ती गई. वर्तमान स्वरूप में मंदिर को लगभग 25 वर्ष पहले नया रूप दिया गया था. उसी दौरान यहां भगवान राम की विराट प्रतिमा की स्थापना की गई, जिसके बाद से यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बन गया.

त्रेता युग की कथा से जुड़ा है मंदिर

मंदिर के पुजारी कुलदीप दास बताते हैं कि विजय राघव मंदिर में स्थापित भगवान राम का विराट स्वरूप त्रेता युग की एक पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है. मान्यता के अनुसार भगवान राम के जन्म से पहले माता कौशल्या को भगवान ने अपने दिव्य और विराट रूप के दर्शन कराए थे. इस प्रसंग का उल्लेख गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस में भी मिलता है.

उसी दिव्य स्वरूप की स्मृति को जीवित रखने के लिए इस मंदिर में भगवान राम की विराट प्रतिमा स्थापित की गई है. यही कारण है कि यह मंदिर अन्य मंदिरों से अलग और विशेष माना जाता है.

श्रद्धालुओं की पूरी होती हैं मनोकामनाएं

स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से पूजा और दर्शन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसी आस्था के कारण अयोध्या आने वाले श्रद्धालु श्रीराम जन्मभूमि मंदिर और हनुमानगढ़ी के दर्शन करने के बाद विश्व विराट विजय राघव मंदिर में भी अवश्य पहुंचते हैं.

आध्यात्मिक अनुभूति का विशेष स्थल

अयोध्या की धार्मिक परंपरा में यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभव का भी महत्वपूर्ण स्थान बन चुका है. यहां भगवान राम के विराट स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु स्वयं को धन्य महसूस करते हैं और प्रभु श्रीराम की कृपा प्राप्त करने की कामना करते हैं.

यही वजह है कि यह मंदिर आज राम भक्तों के लिए एक विशेष तीर्थ स्थल के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुका है.



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