अयोध्या प्रसाद की बनाई लोहे की मुंदरी से भूत-प्रेत रहते हैं कोसों दूर! जानिए
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सुल्तानपुर के अयोध्या प्रसाद लोहे की मुंदरी बनाते हैं, जो भूत-प्रेत से बचाव के लिए पहनी जाती है. यह परंपरा उनके परिवार में पीढ़ियों से चली आ रही है.
मुंदरी बनाते हुए अयोध्या प्रसाद
हाइलाइट्स
- अयोध्या प्रसाद बनाते हैं भूत-प्रेत से बचाने वाली लोहे की मुंदरी.
- लोहे की मुंदरी उंगली में पहनने से भूत-प्रेत दूर रहते हैं.
- मुंदरी बनाने की परंपरा अयोध्या प्रसाद के परिवार में पीढ़ियों से चली आ रही है.
विशाल तिवारी/सुल्तानपुर. अक्सर हम देखते हैं कि हमारे आसपास कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिनका जुड़ाव कई साल पुरानी चीजों से होता है और उनके बारे में समय-समय पर कहानियां भी बताई गई हैं. आज हम आपको एक ऐसी ही कहानी बताने जा रहे हैं, जिसे ‘लोहे की मुंदरी’ कहा जाता है. यह लोहे की मुंदरी अवध क्षेत्र में लोहे की अंगूठी के नाम से जानी जाती है. प्राचीन काल से लेकर आज तक कर्म को ही जाति का आधार माना गया है और यही वजह है कि वर्तमान में सुल्तानपुर में लोहार जाति के अयोध्या प्रसाद अपने पारंपरिक व्यवसाय को संजोए हुए हैं और प्राचीन आभूषणों को बनाकर कमाई कर रहे हैं. तो आइए जानते हैं क्या होती है लोहे की मुंदरी और इसका किस तरह से उपयोग किया जाता है.
क्या होती है मुंदरी?
सुल्तानपुर के रहने वाले अयोध्या प्रसाद विश्वकर्मा ने लोकल 18 से बातचीत के दौरान बताया कि लोहे की मुंदरी, जिसे स्थानीय भाषा में लोहे की अंगूठी भी कहा जाता है, के पीछे एक मान्यता है. ऐसा माना जाता है कि अगर इसे उंगलियों में पहन लिया जाए तो भूत-प्रेत आदि नजदीक नहीं आते, क्योंकि यह लोहे की मुंदरी किसी तीसरी शक्ति को आसपास भटकने नहीं देती और दूर हटा देती है.
कैसे बनती है मुंदरी?
दरअसल, लोहे की मुंदरी को बनाने के लिए लोहे की एक पतली रॉड होती है जिसे आग की भट्टी में तपाया जाता है. इसके बाद उस लोहे की रॉड को उंगली के आकार के लोहे पर 360 डिग्री कोण में घुमा दिया जाता है. एक राउंड घूमने के बाद उस रॉड को काट दिया जाता है जिससे मुंदरी बनकर तैयार हो जाती है. यह प्रत्येक उंगली के अलग-अलग साइज के हिसाब से बनाई जाती है.
पारिवार दर परिवार चल रही परंपरा
पारंपरिक व्यवसाय को संजोए रखा अयोध्या प्रसाद ने बताया कि लोहे की मुंदरी बनाने का उनका यह काम पारिवारिक है. उनसे पहले उनके पिताजी और उनके बाबा भी लोहे की मुंदरी बनाने का काम करते थे. हालांकि, लोहे की मुंदरी बनाने के बाद अयोध्या प्रसाद उसे बाजार में नहीं भेजते बल्कि लोग खुद ही उनके पास लेने के लिए आते हैं. इससे अयोध्या प्रसाद को अच्छी कमाई भी हो रही है.
Sultanpur,Uttar Pradesh
March 05, 2025, 15:21 IST