अरहर की फसल में फूल झड़ने और माहू रोग से बचाव के उपाय, अधिक पैदावार और लाभ के लिए जरूरी सावधानियां!

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अरहर की फसल में फूल झड़ने और माहू रोग से बचाव के उपाय, अधिक पैदावार और लाभ के लिए जरूरी सावधानियां!


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जानिए अरहर की फसल में माहू रोग से बचाव के उपाय और अधिक पैदावार के टिप्स

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अरहर की फसल किसानों के लिए लाभकारी नकदी फसल है, लेकिन फूल झड़ने और माहू रोग की समस्या से पैदावार पर गंभीर असर पड़ता है. रोग प्रभावित पौधों में पत्तियां मुड़ जाती हैं और फूल व छोटी फलियां झड़ने लगती हैं. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर “अमिडा क्लोरोपिड” दवा का छिड़काव फसल को बचाने और नुकसान कम करने में मदद करता है. द्वितीय फूल का निकलना फसल के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए सही पहचान और उचित उपचार से किसानों का लाभ अधिकतम किया जा सकता है.

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कौशाम्बी. अरहर की खेती किसानों के लिए नकदी फसल मानी जाती है, कम लागत में अच्छी पैदावार और बेहतर दाम मिलने की वजह से किसान इस फसल को उगाते हैं. लेकिन कई बार फसल में रोग और कीटों का प्रकोप बढ़ने से फूल झड़ने लगते हैं, जिससे पैदावार पर सीधा असर पड़ता है और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. अरहर की इन दोनों फसल में फूल निकलना शुरू हो गया है, अरहर की फसल में फूल गिरने की समस्या रस चूसने वाले कीट से होती है, जिसे माहू रोग कहा जाता है. फसल में माहू रोग लगने पर सफेद मक्खी और फली छेदक की संख्या बढ़ जाती है. ये कीट पौधों का रस चूसते हैं, जिससे पौधे कमजोर हो जाते हैं और फूल व छोटी फलियां झड़ने लगती हैं. ऐसे में किसान को फसल में लगने वाले रोग को तुरंत पहचानकर दवाई का छिड़काव करना चाहिए, अन्यथा फसल पूरी तरह से बर्बाद हो सकती है.

अरहर की फसल मुख्य रूप से 6 से 8 महीने की खेती होती है, इस फसल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बुवाई करने के बाद पूरे फसल तैयार होने तक एक बार भी पानी की सिंचाई नहीं करनी पड़ती और बुवाई के समय केवल यूरिया खाद का प्रयोग किया जाता है, इसलिए अरहर की फसल कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली खेती मानी जाती है. अरहर की फसल में लगने वाले मुख्य रोग, जिसे माहू रोग कहते हैं, की पहचान करने के लिए पत्तियों और टहनियों को देखें. छोटे-छोटे झुंड में हरे, काले या भूरे रंग के कीट पत्तियों की निचली सतह और नई टहनियों पर चिपके दिखाई देते हैं. ये सीधे फूल पर आक्रमण करते हैं, इससे प्रभावित पत्तियां ऊपर या अंदर की ओर मुड़ जाती हैं और पौधे की बढ़वार रुकने लगती है. इस स्थिति में किसान “अमिडा क्लोरोपिड” दवा का घोल बनाकर फसल में छिड़काव कर सकते हैं. दवा का छिड़काव करने के लिए एक बीघे में कम से कम 15–20 लीटर पानी में 15–20 मिलीलीटर दवा मिलाकर घोल तैयार करें और प्रति बीघा के हिसाब से दवा का छिड़काव करें, ताकि फसल बचाई जा सके.

अरहर की फसल में निकल रहे द्वितीय फूल

कृषि अधिकारी भगवती प्रसाद मौर्य ने बताया कि इन दिनों अरहर की फसल में द्वितीय फूल निकल रहे हैं. अरहर की फसल में दो बार फूल निकलते हैं, प्रथम फूल ठंड के मौसम में निकले थे, लेकिन अधिक ठंड पड़ने के कारण झड़ गए. अब द्वितीय फूल निकल रहे हैं, द्वितीय फूल का निकलना बहुत ही महत्वपूर्ण है. सुबह और शाम हल्की ठंड पड़ने के कारण अरहर की फसल में माहू रोग लग जाता है. फसल में माहू रोग लगने से फूल का रस चूसने लगते हैं, जिससे फली बनने में समस्या उत्पन्न होती है. इसके साथ ही, यदि प्रथम फूल बचे हैं, तो उनमें फली छेदक रोग लग जाता है, ऐसे में किसान को लगभग 50% तक फसल का नुकसान हो सकता है. इन रोगों से फसल को बचाने के लिए कृषि अधिकारी ने बताया कि “अमिडा क्लोरोपिड” दवा माहू रोग के लिए विशेष रूप से प्रभावी है. 1.50 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से दवा का घोल बनाकर फसलों में छिड़काव करें. दवा का इस्तेमाल करने से फसल में लगने वाले छेदक और सुंडी रोग, साथ ही फूल को चूसने वाले कीट सभी खत्म हो जाएंगे. किसान को फसलों में यह प्रक्रिया करने से हानि कम होगी और लाभ अधिकतम होगा.

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Monali Paul

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