अलीगढ़ की मिठास की पहचान है जमालपुर का मालपुआ, घी और चाशनी का परफेक्ट संगम

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अलीगढ़ की मिठास की पहचान है जमालपुर का मालपुआ, घी और चाशनी का परफेक्ट संगम


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अलीगढ़, जिसे आमतौर पर ताला और तालीम का शहर कहा जाता है, सिर्फ अपनी ऐतिहासिक धरोहर के लिए ही नहीं बल्कि लाजवाब व्यंजनों के लिए भी जाना जाता है. खासकर जमालपुर इलाके में स्थित ‘जगदीश स्वीट्स’ का मालपुआ हर उम्र के लोगों का दिल जीतता है. सुनहरी परत, घी की खुशबू और मीठी चाशनी का परफेक्ट संगम इसे अलीगढ़ की मिठास और परंपरा का एक अनोखा हिस्सा बनाता है.

ताला और तालीम का शहर कहे जाने वाला अलीगढ़ अपने खास खाने पीने के व्यंजनों के लिए भी बेहद प्रसिद्ध है. इन्हीं खास व्यंजनों में से एक है अलीगढ़ के जमालपुर में स्थित जगदीश स्वीट्स वालों का मालपुआ. जिसकी मिठास कुछ ऐसी है कि मुंह में रखते ही स्वाद का जादू घुल जाता है. इसलिए इसे अलीगढ़ की मिठास भी कहा जाता है.

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जगदीश स्वीट्स वालों का कहना है कि वे पिछले करीब 40 सालों से मालपुआ बना रहे हैं और स्वाद में कभी कोई समझौता नहीं किया. इस दुकान की खासियत यह है कि यहां मालपुआ वनस्पति घी में बनाया जाता है, और इसकी चाशनी शुद्ध खांड से तैयार होती है. हर बाइट में सॉफ्टनेस और मिठास का ऐसा मेल होता है कि एक बार खाने वाला दोबारा जरूर लौटकर आता है.

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यहां के मालपुए का आकार थोड़ा बड़ा होता है, और इसे खास अंदाज़ में तवा पर धीमी आंच पर सेंका जाता है. सुनहरी परत आने के बाद इसे गाढ़ी चाशनी में डुबोया जाता है ताकि हर हिस्से में मिठास बराबर पहुंचे. ऊपर से हल्की सी केसर और पिस्ता की बुरकन इसे और आकर्षक बना देती है. जिससे इसका स्वाद दो गुना हो जाता है.

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दुकानदार जगदीश बताते हैं कि मालपुआ बनाने के लिए सबसे पहले मैदा, सूजी, दूध और थोड़ा सा दही मिलाकर घोल तैयार किया जाता है. इस घोल को करीब 3 से 4 घंटे तक रखा जाता है ताकि हल्की खटास आ जाए. फिर घी में गोल-गोल मालपुए तले जाते हैं. दूसरी तरफ खांड और पानी से एक तार की चाशनी बनाई जाती है, जिसमें ये गरम मालपुए डुबोए जाते हैं. यही चाशनी इसे वो पारंपरिक स्वाद देती है जो पुराने ज़माने की मिठाइयों में हुआ करता था.

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मालपुए के रेट की बात करें तो यहां के मालपुओं की कीमत 480 रूपये प्रति किलो है, जबकि एक पीस का रेट 50 रूपये रहता है. रविवार और त्योहारों के दिन तो दुकान के बाहर लंबी कतार लग जाती है. कई लोग खास तौर पर यहां सिर्फ मालपुआ खाने के लिए शहर के अलावा शहर के दूसरे हिस्सों से भी आते हैं.

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अलीगढ़ के जमालपुर मे स्थित जगदीश स्वीट्स वालों के मुताबिक, उनके परिवार की तीन पीढ़ियां इस कारोबार में हैं. मिठाई बनाने का काम सुबह 4 बजे शुरू हो जाता है ताकि ग्राहकों को हमेशा ताज़ा और गरम मालपुआ मिल सके. दुकान की रसोई से आती घी की महक और छनने की आवाज़ ही लोगों को अपनी ओर खींच लाती है.

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अगर आप अलीगढ़ आएं या अलीगढ़ से गुज़रना हो तो जमालपुर के इस इलाके में स्थित जगदीश स्वीट्स का मालपुआ जरूर चखें. यह सिर्फ एक मिठाई नहीं बल्कि अलीगढ़ की परंपरा और स्वाद की पहचान है, जो हर कौर के साथ आपको देसीपन का एहसास कराएगा.इस मालपुए ने अलीगढ़ मे अपनी एक खास पहचान बना ली है.

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