आखिर क्या है मऊ के देवरानी-जेठानी पोखर की कहानी? साल में दो बार लगता है मेला
मऊ: उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद की देवरानी-जेठानी पोखर का महत्व विशेष है. बताया जाता है कि यहां एक ही परिवार की दो महिलाओं ने 16वीं शताब्दी में दो पोखरे का निर्माण कराया और उस समय से यहां धार्मिक प्रचलन चला आ रहा है और लोग यहां पूजा-पाठ करते हैं और अपनी मन्नत को मानते हैं, तो आइए जानते हैं क्या है देवरानी-जेठानी पोखर का विशेष महत्व और यहां के मंदिरों का.
लोकल 18 से बात करते हुए मंदिर समिति के अध्यक्ष सुभाष यादव बताते हैं कि उनके पूर्वजों का कहना है कि 16वीं शताब्दी में इस पोखर का निर्माण कराया गया, उस समय बहुत ही पानी के लिए समस्या होती थी. लोगों की सुविधाओं को देखते हुए यहां एक ही परिवार की दो महिलाओं ने दो पोखरे का निर्माण कराया, तभी से इस स्थान पर धार्मिक अनुष्ठानों का प्रचलन चला आ रहा है. पोखरी के खुदाई के साथ-साथ यहां बगल में मां काली के मंदिर का निर्माण कराया गया. तब से आज तक इस मंदिर पर लोग आकर पूजा-पाठ करते हैं और अपनी मन्नतों को मांगते हैं और अपनी मनोकामना को पूर्ण करते हैं.
पोखरी के बगल में बनाया गया है तीन मंदिर
मंदिर समिति के सदस्य प्रदीप कुमार गुप्ता बताते हैं कि इस मंदिर पर लोगों का श्रद्धा भाव अधिक बढ़ जाने की वजह से यहां तरह-तरह कार्यक्रम का आयोजन होता है और पूरे क्षेत्र के लोग आकर यहां पूजा-पाठ करते हैं. यहां तीन मंदिर बनाए गए हैं, जिसमें सबसे प्राचीन काली माता का मंदिर, हनुमान मंदिर और शनि महाराज का मंदिर है. उनका कहना है कि जब से वह इस मंदिर समिति से जुड़े हैं, उनकी हर मनोकामना पूर्ण होती है.
तालाब के बगल में बने इस पोखरे पर यदि कोई सच्चे मन से आकर पूजा पाठ करे, तो उसकी मुराद अवश्य पूरी होती है. यही वजह है कि इस मंदिर पर लोग आते रहते हैं. वर्तमान में इस पोखरे के बगल में एक धर्मशाला का निर्माण कराया जा रहा है, ताकि आने वाले समय में गरीब असहाय लोग छोटे-मोटे कार्यक्रम नि:शुल्क इस मंदिर प्रांगण के धर्मशाला पर कर सकें.
पोखरी का कराया जा रहा सुंदरीकरण
इस पोखरे और मंदिर की मान्यता को देखते हुए सरकार की ओर से दो करोड़ रुपए का बजट इस पोखरे की सुंदरीकरण करने के लिए पास किया है. हालांकि यहां सुंदरीकरण का कार्य चल रहा है, क्योंकि सालों से जनता की मांग चली आ रही थी कि यहां की पोखरी का सुंदरीकरण कराया जाए, इसको ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह बजट पास किया है.
देश के कई राज्यों से आते हैं लोग करने पूजा-पाठ
संजय कुमार बताते हैं कि इस पोखरी की मान्यता है कि यहां कोई स्नान करता है, तो उसकी कुष्ठ रोग ठीक होते हैं. हालांकि वर्तमान में इस पोखरे की स्थिति ठीक नहीं है, इस वजह से कोई इस पोखरी में स्नान नहीं करता है. लेकिन सरकार की ओर से बजट पास किया गया है और मंदिर समिति की ओर से मिलकर इस पोखरी कि आप साफ सफाई की जा रही है. यहां साल में दो बार मेले का आयोजन किया जाता है और दंगल का आयोजन किया जाता है. यहां मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, राजस्थान जैसे बड़े शहर से लोग आते हैं और यह पूजा-पाठ कर अपनी मन्नतों को मांगते हैं.