इस नई तकनीक से करें शीतकालीन गन्ने की बुवाई, बंपर होगी पैदावार,मुनाफा होगा डबल
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उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती की जाती है. गन्ने की खेती कर किसानों को अच्छा खासा मुनाफा होता है. ऐसे में गन्ने की बुवाई अक्टूबर और नवंबर महीने में शुरू हो जाती है. इस बुवाई को शीतकालीन बुवाई कहा जाता है. कम लागत में अधिक मुनाफा गन्ने की खेती से कमाया जा सकता है.
उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती की जाती है. गन्ने की खेती कर किसानों को अच्छा खासा मुनाफा होता है. ऐसे में गन्ने की बुवाई अक्टूबर और नवंबर महीने में शुरू हो जाती है. इस बुवाई को शीतकालीन बुवाई कहा जाता है. कम लागत में अधिक मुनाफा गन्ने की खेती से कमाया जा सकता है.

वर्टिकल बड’ तकनीक से गन्ने की खेती करने से अच्छा खासा मुनाफा भी होगा.वर्टिकल बड तकनीक से गन्ने को खड़ा बोया जाता है. इस तकनीक से एक गन्ने की आंख से लगभग 20 गन्ने निकलते हैं, इस तकनीक से गन्ने फसल में 70 फीसदी तक कम पानी लगता है.

गन्ना यूं तो जमीन में होरिजेंटल यानि कि बेड़ा बोया जाता है. पर ‘वर्टिकल बड’ तकनीक में गन्ना कूंड के ऊपर बोया जाता है, वो भी खड़ी गुल्ली के रूप में इसके पीछे लॉजिक है कि गन्ने की फसल को तेज धूप की आवश्यकता होती है. गन्ने की बढ़ने के लिए हवा, पानी, जमीन और नमी का प्रबंधन बहुत जरूरी होता है.

वर्टिकल बड कॉन्सेप्ट से गन्ने की फसल में पानी की मात्रा भी काफी कम लगती है. रो-टू-रो की दूरी अधिक होने से पानी कम से कम लगता है, जबकि सामान्य या ट्रेंच विधि से गन्ना बोने में पानी की खपत ज्यादा होती है. इस विधि से गन्ना की खेती करने से आप लाखों रुपए कमा सकते हैं और कीटों का भी प्रकोप कम रहता है।

वहीं अब किसान गन्ने की बुवाई अलग विधि से करने लगे हैं जिस कारण उन्हें अच्छा खासा मुनाफा होता हैं इस विधि को वर्टिकल बड विधि कहां जाता है. एक एकड़ गन्ने की बुवाई करने के लिए 4 से 5 कुंतल गन्ने की बीज की आवश्यकता होती है .जबकि साधारण रेजर या ट्रेंच से गन्ना बोने में एक एकड़ खेत के लिए 35 से 40 कुंतल गन्ने के बीज की आवश्यकता पड़ती है.

वर्टिकल बड’ तकनीक गन्ना बोने से किसान दो लाइनों के बीच में इंटर क्रॉपिंग भी कर सकते हैं. उसके बीच में सब्जी की बुआई कर लें, चाहे कोई छोटी दलहनी फसल. इससे किसान दोहरा फायदा ले सकते हैं और किसान की आय दोगुनी करने में यह विधि सबसे कारगर साबित हो रही है. ‘वर्टिकल बड’ तकनीक में गन्ना लाइन से लाइन साढ़े चार से पांच फुट की दूरी पर बोया जाता है.