एनडीआरएफ की टीम ने श्रीलंका में ऐसा क्या कर डाला? हो रही खूब तारीफ
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ऑपरेशन सागर बंधु’ के तहत श्रीलंका में तैनात एनडीआएफ टीम स्वदेश लौट आई. टीम की कमान 8वीं बटालियन के कमांडेंट श्री प्रवीण कुमार तिवारी कर रहे थे. इस मौके पर 9 दिसंबर को गजियाबाद एनडीआरएफ में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया है, जिसके मुख्य अतिथि एनडीआरएफ महानिदेशक पीयूष आनंद मुख्य अतिथि होंगे.
नई दिल्ली. श्रीलंका में भारी बारिश और बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए गए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के जांबाजों ने अपना मिशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ के तहत श्रीलंका के गम्पहा जिले में तैनात एनडीआएफ टीम स्वदेश लौट आई. टीम की कमान 8वीं बटालियन के कमांडेंट श्री प्रवीण कुमार तिवारी कर रहे थे. इस मौके पर 9 दिसंबर को गजियाबाद एनडीआरएफ में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया है, जिसके मुख्य अतिथि एनडीआरएफ महानिदेशक पीयूष आनंद मुख्य अतिथि होंगे.
श्रीलंका में बाढ़ के बाद सबसे बड़ी समस्या स्वच्छ पेयजल की थी. हजारों परिवार दूषित पानी पीने को मजबूर थे. एनडीआरएफ ने वहां दिन-रात एक कर सैकड़ों कुओं की गहन सफाई की, कीचड़ और गंदा पानी निकाला तथा पानी शोधन संयंत्रों से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति बहाल की. इसके अलावा प्रभावित गांवों में राहत सामग्री बांटी, बीमार लोगों को दवा-इलाज मुहैया कराया और पुनर्वास के काम में स्थानीय प्रशासन का हाथ बंटाया.
टीम ने श्रीलंका के स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और अन्य एजेंसियों के साथ पूरा तालमेल रखते हुए काम किया. जलजनित बीमारियों का खतरा बहुत बढ़ गया था, जिसे एनडीआरएफ के विशेष अभियान ने काफी हद तक कम कर दिया. श्रीलंकाई नागरिकों ने भारतीय जवानों की तारीफ करते हुए कहा कि ‘ये हमारे सच्चे सागर बंधु हैं.’मिशन पूरा होने के बाद आज पूरी टीम भारत लौट आई है.
9 दिसंबर को सुबह 11 बजे गजियाबाद एनडीआरएफ में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया है, जिसमें यह वीर जवान अपना अनुभव साझा करेंगे. जिन्होंने पड़ोसी देश में मानवता की अनुपम सेवा की. भारत के इस मिशन एक बार फिर साबित किया है कि मुसीबत की घड़ी में भारत अपने पड़ोसियों के साथ पूरी ताकत से खड़ा होता है. देश या विदेश में कहीं भी आपदा आती है, एनडीआरएफ की टीम वहां रेस्क्यू के लिए पहुंच जाती है. एनडीआरएफ अब तक कई देशों में रेस्क्यू ऑपरेशन चला चुका है. आपदा की स्थिति में एनडीआरएफ जवान लोगों के लिए देवदूत बनकर पहुंच जाते हैं.