एनसीआर की हवा में घुला जहर, गाजियाबाद में बिगड़े हालात, इतना पहुंचा AQI, सांस लेना हुआ मुश्किल

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एनसीआर की हवा में घुला जहर, गाजियाबाद में बिगड़े हालात, इतना पहुंचा AQI, सांस लेना हुआ मुश्किल


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Ghaziabad Air Quality: गाजियाबाद में दिवाली के बाद प्रदूषण बढ़ गया है. AQI 354 तक पहुंच गया है. लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी है. आंखों में जलन हो रही है. लोग मॉर्निंग वॉक छोड़ घरों में रहने लगे हैं.

एनसीआर में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है. दिवाली के बाद से हवा में जहरीले कणों की मात्रा तेजी से बढ़ी है. गाजियाबाद की बात करें तो बुधवार सुबह एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 354 दर्ज किया गया, जो खतरनाक श्रेणी में आता है. इसका मतलब है कि शहर की हवा सांस लेने लायक नहीं रह गई है. सुबह की हवा जो कभी ताजगी देती थी अब दम घोंटने जैसी महसूस हो रही है. आसमान में धुंध की चादर छाई है और दूर तक साफ दिखाई नहीं दे रहा.

प्रदूषण के बढ़ते स्तर का असर अब लोगों की दिनचर्या पर भी दिखने लगा है. सुबह के समय पार्कों और सड़कों पर मॉर्निंग वॉक करने वालों की संख्या में कमी देखी जा रही है, जो लोग नियमित रूप से टहलने निकलते थे वे अब घरों में ही रुकने को मजबूर हैं. कई लोगों का कहना है कि तेज जलन, खांसी और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं बढ़ने लगी हैं. प्रदूषण से परेशान लोग अब अपनी सेहत को लेकर चिंतित हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में बिना मास्क के बाहर निकलना खतरनाक हो सकता है और बच्चों, बुजुर्गों व सांस के मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए.

गाजियाबाद के रहने वाले उपेंद्र सिंह ने बताया कि बीते कुछ दिनों में प्रदूषण बहुत ज्यादा बढ़ गया है. सुबह के समय सांस लेने में दिक्कत होती है. उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले बारिश से मौसम साफ था, लेकिन अब हालत खराब हैं. मॉर्निंग वॉक के दौरान आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी महसूस होती है, जो लोग अस्थमा या सांस से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित हैं वे अब सुबह घरों से निकलने से भी बच रहे हैं. उपेंद्र सिंह का कहना है कि अब मॉर्निंग वॉक का समय बदलना पड़ेगा क्योंकि ताजी हवा के लिए बाहर निकलना जोखिम भरा हो गया है. आने वाले दिनों में शायद मास्क लगाकर ही टहलना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि अब तो बस बारिश पर ही उम्मीद है. क्योंकि वही एक तरीका है जिससे हवा में घुला यह जहर कुछ हद तक साफ हो सकता है.

गाजियाबाद के रहने वाले ब्रजेश सिंह ने बताया कि सुबह के समय आंखों में जलन होती है और सांस लेना भी मुश्किल हो गया है. उन्होंने कहा कि हवा में जहर सा घुल गया है, जिससे लोग अब मॉर्निंग वॉक पर जाने से बच रहे हैं. अगर प्रदूषण का यही हाल रहा तो हमें मॉर्निंग वॉक का समय बदलना पड़ेगा. वहीं बच्चे और बुजुर्ग बढ़ते प्रदूषण के कारण अब घरों में ही व्यायाम करने को मजबूर हैं. उनका कहना है कि दिवाली से पहले भी हवा में धुंध थी, लेकिन आतिशबाजी ने स्थिति और बिगाड़ दी. ब्रजेश सिंह ने सरकार से अपील की कि प्रदूषण कम करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि लोग फिर से राहत की सांस ले सके.

Lalit Bhatt

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों में रिपोर्टिंग से ल…और पढ़ें

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों में रिपोर्टिंग से ल… और पढ़ें

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