कर्ज, रोग और भय से मुक्ति चाहते हैं? सुल्तानपुर के ये 5 हनुमान मंदिर जरूर जाएं
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भारत में सप्ताह के अलग-अलग दिन विभिन्न देवी-देवताओं की पूजा के लिए विशेष माने जाते हैं. इन्हीं में से एक है मंगलवार, जिसे भगवान श्री हनुमान जी की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और भक्तों को आत्मबल प्राप्त होता है. इसी मंगलवार के अवसर पर आज हम आपको सुल्तानपुर के ऐसे पांच प्रमुख हनुमान मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां दर्शन मात्र से ही श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास और भी मजबूत हो जाता है.
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में एक हनुमान मंदिर स्थित है, जिसे बाबा धाम के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि यहां आने वाले भूत-प्रेत या अन्य गंभीर समस्याओं से परेशान लोगों को मुक्ति मिलती है और उनकी समस्याओं का निदान हो जाता है. अठैसी गांव निवासी केशरी प्रसाद सिंह ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि बाबा धाम के पुजारी संजय को पहले भूत-प्रेत और मानसिक रूप से कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था, जिसके चलते वे काफी परेशान रहते थे. लेकिन, बाबा धाम में हनुमान जी का मंदिर बनने के बाद संजय बाबा को इन समस्याओं से मुक्ति मिल गई और अब वे स्वयं यहां आने वाले श्रद्धालुओं की समस्याओं के निवारण में सहायता करते हैं.

सुल्तानपुर शहर के डाक खाना चौराहे पर स्थित हनुमानगढ़ी मंदिर के अंदर पांच मुख वाले हनुमान जी विराजमान हैं. यहां लोग सुबह-शाम दर्शन के लिए आते हैं और मंगलवार व शनिवार को भव्य भीड़ देखने को मिलती है. मंदिर के बाहर फूल-माला और प्रसाद की कई दुकानें हैं, जो श्रद्धालुओं की सेवा में कार्य कर रही हैं.

सुल्तानपुर शहर मुख्यालय से लगभग 7 किलोमीटर दूर कटावा ग्राम सभा में बाबा सरवन दास की कुटिया में एक भव्य और दिव्य हनुमान मंदिर स्थापित है. मंदिर के पुजारी रामनाथ कोरी ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि इस मंदिर में स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा का इतिहास लगभग डेढ़ सौ वर्ष पुराना है. यह प्रतिमा अयोध्या में सरयू नदी के किनारे से लाई गई थी, जिसे स्वयं बाबा सरवन दास अपने साथ लेकर आए थे.
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विजेथुआ महावीरन धाम, सूरापुर–सुलतानपुर में स्थित एक अत्यंत प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर है. यहां मंगलवार और शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए आते हैं. इस स्थान का रामायण से जुड़ा अपना एक विशेष महत्व है. मान्यता है कि जब भगवान हनुमान लक्ष्मण के लिए संजीवनी लाने जा रहे थे, तब उन्होंने दैत्य कालनेमि का वध किया और यहां विश्राम किया था. मंदिर के किनारे स्थित मकर कुंड में भगवान हनुमान ने स्नान भी किया था. बताया जाता है कि रावण ने भगवान राम के कार्य में बाधा डालने के लिए कालनेमि नामक राक्षस को नियुक्त किया था.

सुल्तानपुर शहर के सिविल लाइन में स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर का इतिहास लगभग 51 वर्ष पुराना है. प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को यहां श्रद्धालुओं की भव्य भीड़ देखने को मिलती है. मंदिर को लेकर मान्यता है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से पूजा-पाठ करता है, हनुमान जी उसके सभी कष्ट दूर करते हैं. इस मंदिर के ठीक सामने एक काफी पुराना पीपल का पेड़ स्थित है, जिसकी छाया से मंदिर परिसर सदैव आच्छादित रहता है.