किसान आलू की खेती की बुवाई से पहले करें ये काम, बंपर होगी पैदावार
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Agriculture News: कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान खेत की जुताई और खाद डालने की प्रक्रिया को सही ढंग से अपनाएं तो पैदावार कई गुना बढ़ सकती है, लेकिन लापरवाही नुकसानदायक साबित होती है
जनपद कन्नौज में आलू किसानों के लिए यह मौसम बेहद अहम है. जिले में करीब 55,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में आलू की खेती की जाती है, ऐसे में फसल की शुरुआत के समय किसानों द्वारा की गई एक छोटी सी गलती भी भारी नुकसान का कारण बन सकती है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान खेत की जुताई और खाद डालने की प्रक्रिया को सही ढंग से अपनाएं तो पैदावार कई गुना बढ़ सकती है, लेकिन लापरवाही नुकसानदायक साबित होती है.
अक्सर देखा जाता है कि किसान गोबर की खाद डालते समय उसे खेत में जगह-जगह ढेर बनाकर छोड़ देते हैं. फिर जुताई कर देते हैं. कृषि वैज्ञानिक सुशील कुमार बताते हैं कि यह तरीका बिल्कुल गलत है. खाद को खेत में ढेरों के रूप में रखने से वह मिट्टी में समान रूप से नहीं मिल पाती, जिससे फसल की जड़ों को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता, इसके विपरीत, अगर किसान गोबर की खाद को पूरे खेत में समान रूप से फैला कर जुताई करें, तो मिट्टी में जैविक तत्व अच्छे से मिश्रित हो जाते हैं और मिट्टी की उर्वरता कई गुना बढ़ जाती है.
खाद की पहचान
खाद की गुणवत्ता पहचानने का एक आसान तरीका भी बताया गया है. अगर गोबर की खाद को हाथ में लेकर लड्डू के आकार में बनाते समय वह हाथ में नहीं चिपकती, तो इसका मतलब है कि खाद पूरी तरह सड़ी हुई और खेत के लिए उपयुक्त है. वहीं, कच्चा गोबर खेत में डालना नुकसानदायक होता है. कच्चा गोबर खेत की मिट्टी से नाइट्रोजन खींच लेता है, जिससे मिट्टी की शक्ति घटती है और फसल की वृद्धि पर असर पड़ता है.
क्या बोले कृषि वैज्ञानिक
कृषि वैज्ञानिक सुशील कुमार का कहना है कि जुताई के समय पूरी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद को समान रूप से फैलाना चाहिए. ऐसा करने से खाद मिट्टी में अच्छे से मिल जाती है, जिससे मिट्टी मुलायम, पोषक और ताकतवर बनती है. परिणामस्वरूप आलू की फसल मजबूत और गुणवत्तापूर्ण होती है. कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे खाद डालने और जुताई की प्रक्रिया में वैज्ञानिक पद्धति अपनाएं, ताकि कन्नौज की आलू उत्पादकता और गुणवत्ता दोनों में इजाफा हो सके. उचित तैयारी से न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि बाजार में अच्छी कीमत भी मिलेगी, जिससे किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी.