किसी भी परीक्षा की निष्पक्षता से समझौता नहीं.. हाईकोर्ट का अहम फैसला

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किसी भी परीक्षा की निष्पक्षता से समझौता नहीं.. हाईकोर्ट का अहम फैसला


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Allahabad High Court News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती 2025 पेपर लीक पर परीक्षा परिणाम रद्द करने के सरकारी फैसले को उचित ठहराते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया. जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की सिंगल बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी भी परीक्षा की निष्पक्षता से समझौता नहीं किया जा सकता.

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इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी भी परीक्षा में निष्पक्षता से समझौता नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती 2025 पेपर लीक पर परीक्षा परिणाम रद्द करने के सरकारी फैसले पर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया. कोर्ट ने असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर भर्ती परीक्षा 2025 का परीक्षा परिणाम रद्द करने के फैसले को को उचित ठहराया है.

बता दें कि यह मामला प्रदेश के मान्यता प्राप्त निजी डिग्री कालेजों में 33 अलग विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर भर्ती से जुड़ा है. राज्य सरकार ने पेपर लीक से कुछ लोगों को पहुंचे लाभ के कारण परीक्षा परिणाम निरस्त कर दिया था. कोर्ट ने कहा कि परीक्षा परिणाम ही घोषित हुआ था, चयन प्रक्रिया जारी थी, इसलिए चयनित होने के तर्क को स्वीकार नहीं किया जा सकता.

224 याचियों ने दाखिल की थी 15 याचिका

गौरतलब है कि कुमारी लक्ष्मी समेत 224 याचीगण ने 15 याचिकाओं में इस परीक्षा परिणाम निरस्त करने के निर्णय को चुनौती दी थी जिसकी सुनवाई जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की सिंगल बेंच में हुई. हाईकोर्ट ने इन याचिकाओं को निस्तारित करते हुए कहा कि कि किसी भी परीक्षा में निष्पक्षता सर्वोपरि होती है और इससे किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता. राज्य को दोषपूर्ण परीक्षा प्रक्रिया को जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है, क्योंकि लिखित परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक हुए थे और कुछ उम्मीदवारों को लाभ हुआ था. हाईकोर्ट ने पाया कि यह निर्णय विस्तृत जांच और विशेष प्रमाण के आधार पर लिया गया था. जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि लगभग 19 अभ्यर्थियों को लाभ हुआ था. कोर्ट ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी, क्योंकि केवल लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ था और साक्षात्कार शेष था.  इसलिए याचीगण यह दावा नहीं कर सकते कि वे अंतिम चयन में प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुए हैं.

परीक्षा में निष्पक्षता सर्वोपरि

परीक्षा में निष्पक्षता को सर्वोपरि मानते हुए कोर्ट ने एम्पलाई स्टेट इंश्योरेंस कारपोरेशन बनाम डॉ. विनय कुमार और अन्य (2022) में सु्प्रीम कोर्ट के निर्णय का भी उल्लेख किया और कहा कि याची नई लिखित परीक्षा में भाग ले सकते हैं. इसके लिए पहले से ही कार्यक्रम प्रकाशित किया जा चुका है. याचीगण ने कुल 910 पदों पर असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए विज्ञापन संख्या 51/2022 के तहत भर्ती प्रक्रिया में भाग लिया था. लिखित परीक्षा 16-17 अप्रैल 2025 को 52 केंद्रों पर दो पालियों में हुई थी. लिखित परीक्षा के तुरंत बाद दो एफआईआर दर्ज की गई. इसमें आरोप लगाया गया कि लिखित परीक्षा के प्रश्न पत्रों को भारी पैसे लेकर प्रदान किया था. एसटीएफ ने इसकी जांच की थी.

कोर्ट ने माना अनियमितता हुई

कोर्ट ने माना कि अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित अन्य परीक्षाओं की तुलना में यह परीक्षा बहुत ही सीमित परिसर में आयोजित की गई थी. यदि कुछ अभ्यर्थियों द्वारा भी अनियमितताएं पाई गईं, तो जांच के साक्ष्यों के आधार पर पूरी परीक्षा रद्द की जा सकती है. कोर्ट ने पाया कि एसटीएफ की जांच रिपोर्ट के आधार पर उच्च स्तर पर उचित विचार-विमर्श किया गया था. इसमें पाया गया कि मामला व्यवस्थित अनियमितताओं और व्यापक रूप से अनुचित साधनों के उपयोग का था. क्योंकि विभिन्न कागजात लीक किए गए और लाभार्थियों अर्थात् अभ्यर्थियों को बेचे गए. कोर्ट ने कहा, यह ऐसा मामला नहीं है जहां राज्य ने कोई जांच नहीं की है. बल्कि दो प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई हैं और जांच के बाद दो आरोपपत्र भी दाखिल किए गए हैं. एसटीएफ ने थाना विभूतिखंड लखनऊ में दर्ज केस में महबूब अली, बैजनाथ पाल व विनय पाल को गिरफ्तार किया था. महबूब अली उस समय उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष का गोपनीय सहायक था. पेपर माडरेशन में उसकी भूमिका थी.

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Amit Tiwariवरिष्ठ संवाददाता

अमित तिवारी, News18 Hindi के डिजिटल विंग में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. वर्तमान में अमित उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, ब्यूरोक्रेसी, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और रिसर्च बेस्ड कवरेज कर रहे हैं. अख़बार…और पढ़ें



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