कूड़े का ढेर, टूटी लिफ्ट…मां विंध्यवासिनी धाम में करोड़ों की लागत से बना कॉरिडोर हुआ बदहाल
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Mirzapur News: मां विंध्यवासिनी धाम के परिक्रमा पथ में जगह-जगह पर पान व गुटखे की पीक है. हर कोने में गंदगी फैली हुई है. इसके साथ ही कॉरिडोर में भक्तों के लिए लगाई गई लिफ्ट के बटन को तोड़ दिया गया है. फैन के पंखों को टेढ़ा कर दिया गया है कॉरिडोर में लगाए गए कई इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड को भी तोड़ दिए गए हैं.
मिर्जापुर : उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित मां विंध्यवासिनी धाम के विकास के लिए प्रदेश की योगी सरकार की ओर से 331 करोड़ रुपये जारी किए थे. फंड जारी होने के बाद मां के धाम का विकास कराया गया. व्यवस्थाओं के साथ ही परिक्रमा पथ का निर्माण कराया गया. हालांकि, हालात अब कुछ ऐसे हो गए हैं कि न तो व्यवस्था बची हुई है और न ही व्यवस्थाओं को बनाए रखने के लिए कोई काम हो रहा है. कॉरिडोर परिसर में पान के पीक दिख रहे हैं. सफाई के नाम पर कूड़े को इक्कठा कर दिया जा रहा है और लिफ्ट और इलेक्ट्रीसिटी बोर्ड टूटे हुए हैं. पंखों के हालात खराब हो गए हैं. यूं कह लीजिए कि ध्यान नहीं देने की वजह से भव्य व दिव्य दिखने वाला धाम पान के पीक से लाल हो गया है.
मां विंध्यवासिनी धाम के परिक्रमा पथ में जगह-जगह पर पान व गुटखे की पीक दिख रहे हैं. हर कोने में गंदगी फैली हुई है. इसके साथ ही कॉरिडोर में भक्तों के लिए लगाई गई लिफ्ट के बटन को तोड़ दिया गया है. फैन के पंखों को टेढ़ा कर दिया गया है और दीयों से कालिख दिख रही है. कॉरिडोर में लगाए गए कई इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड को भी तोड़ दिया गया है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर इसको बेहतर बनाने की जिम्मेदारी किसकी है. करोडों रुपये खर्च हुए, लेकिन उनपर पान का पीक दिख रहा है. गुलाबी पत्थर पान और गुटखे के पीक से लाल हो गया है. कॉरिडोर बनकर तैयार हो गया है, लेकिन अभीतक इसके रखरखाव को लेकर प्लान नहीं बन पाया है, इससे अव्यवस्था ज्यादा हो गयी है और दिक्कतें और बढ़ गई हैं.
नहीं दे रहा कोई ध्यान
काशी कॉरिडोर की तर्ज पर मां विंध्यवासिनी धाम में कॉरिडोर बनाया गया. हालांकि अब रखरखाव नहीं होने से व्यवस्थाएं खराब हो गई हैं. पान और गुटखे पर रोक लगाने के लिए जुर्माना शुरू किया गया, लेकिन अभीतक इसका कोई खासा असर देखने को नहीं मिला. सबसे ज्यादा खूबसूरती सिर्फ और सिर्फ पान की पीक खराब कर रही है. कॉरिडोर की देख-रेख नहीं किया गया तो लोकार्पण होने से पहले पुनः एक बार सुंदरीकरण के लिए बजट जारी करना पड़ेगा.
पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों में रिपोर्टिंग से ल…और पढ़ें
पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों में रिपोर्टिंग से ल… और पढ़ें