कृषि ड्रोन से खेती में आएगी क्रांति, 200 लीटर पानी में 1 एकड़ सिंचाई

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कृषि ड्रोन से खेती में आएगी क्रांति, 200 लीटर पानी में 1 एकड़ सिंचाई


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Kanpur Agriculture News: कृषि विमान पारंपरिक खेती के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखता है. यह तकनीक न केवल पानी, समय और लागत की बचत करती है, बल्कि किसानों की शारीरिक मेहनत भी काफी कम करती है. यदि ऐसी तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ा तो आने वाले समय में खेती और अधिक स्मार्ट, आसान और मुनाफेदार बन सकती है. किसानों के लिए यह एक नई उम्मीद और बेहतर भविष्य की दिशा में मजबूत कदम साबित हो रहा है.

खेती में आधुनिक तकनीक का तेजी से विस्तार हो रहा है और इसी क्रम में कृषि विमान किसानों के लिए बड़ा बदलाव बनकर उभरा है. योगी सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करने के प्रयासों के बीच हरियाणा के उद्यमी डॉ. शंकर गोयनका ने अपने स्टार्टअप के तहत इस एग्रीकल्चर ड्रोन का प्रदर्शन किया. उनका कहना है कि यह तकनीक खेती को अधिक आसान, सटीक और लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

पारंपरिक खेती में पानी की भारी बर्बादी
डॉ. गोयनका के अनुसार सामान्य तौर पर जब किसान 1 एकड़ खेत की सिंचाई करते है तो लगभग 70 प्रतिशत पानी बेकार चला जाता है और केवल 30 प्रतिशत पानी ही फसलों तक पहुंच पाता है. इससे न सिर्फ पानी की बर्बादी होती है, बल्कि लागत बढ़ती है और उत्पादन पर भी नकारात्मक असर पड़ता है. इसी कारण किसानों को कम संसाधनों में बेहतर परिणाम देने वाली तकनीक की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी.

कृषि विमान से 200 लीटर पानी में 1 एकड़ सिंचाई
कृषि विमान इस समस्या का प्रभावी समाधान बनकर सामने आया है. इस ड्रोन तकनीक की मदद से 1 एकड़ खेत में मात्र 200 लीटर पानी का छिड़काव कर सिंचाई की जा सकती है. इसकी खासियत यह है कि लगभग 80 प्रतिशत पानी सीधे पौधों तक पहुंचता है और केवल 20 प्रतिशत पानी ही व्यर्थ जाता है. इससे पानी की बड़ी बचत होती है और फसलों को जरूरत के अनुसार नमी मिलती है, जिससे उत्पादन बढ़ने की संभावना अधिक हो जाती है.

दवा छिड़काव में भी बड़ा बदलाव
सिर्फ सिंचाई ही नहीं, कीटनाशक और उर्वरक के छिड़काव में भी कृषि विमान बेहद प्रभावी सिद्ध हो रहा है. पहले किसानों को खुद खेत में उतरकर दवा छिड़कनी पड़ती थी, जबकि अब ड्रोन कुछ ही मिनटों में पूरे खेत पर समान रूप से छिड़काव कर देता है. इससे समय और श्रम की बचत होती है, दवा का समान वितरण सुनिश्चित होता है और किसानों का हानिकारक रसायनों के सीधे संपर्क में आने का जोखिम भी कम हो जाता है.

2000 से 20 हजार कृषि ड्रोन का लक्ष्य
डॉ. गोयनका के अनुसार फिलहाल प्रदेश में लगभग 2000 कृषि ड्रोन उपयोग में है. सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष के अंत तक इनकी संख्या बढ़ाकर 20 हजार तक पहुंचाई जाए. इससे स्पष्ट है कि सरकार खेती को तकनीक से जोड़कर उसे अधिक आधुनिक और लाभकारी बनाने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है.

किसानों के लिए नई उम्मीद बना कृषि विमान
कृषि विमान पारंपरिक खेती के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखता है. यह तकनीक न केवल पानी, समय और लागत की बचत करती है, बल्कि किसानों की शारीरिक मेहनत भी काफी कम करती है. यदि ऐसी तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ा तो आने वाले समय में खेती और अधिक स्मार्ट, आसान और मुनाफेदार बन सकती है. किसानों के लिए यह एक नई उम्मीद और बेहतर भविष्य की दिशा में मजबूत कदम साबित हो रहा है.

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Manish Rai

काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें



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