क्या सच में होता है काला जादू? इस्लाम में क्या है इसके लिए सजा..यहां जानें

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क्या सच में होता है काला जादू? इस्लाम में क्या है इसके लिए सजा..यहां जानें


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जादू-टोना और काला जादू ऐसी बातें हैं जिनके बारे में लोग अक्सर डर और परेशानी के साथ चर्चा करते हैं, और अपने उपर या अपने घर मे आई परेशानियों को भी जादू की वजह से मानते हैं. लेकिन क्या सच मे काला जादू होता है तो बताते चले कि इस्लाम भी मानता है कि इन जादू टोना या काला जादू का असर कभी–कभी इंसानी ज़िंदगी पर पड़ जाता है.

अलीगढ़: जादू-टोना और काला जादू ऐसी बातें हैं जिनके बारे में लोग अक्सर डर और परेशानी के साथ चर्चा करते हैं और अपने ऊपर या अपने घर में आई परेशानियों को भी जादू की वजह से मानते हैं, लेकिन क्या सच में काला जादू होता है, तो बताते चलें कि इस्लाम भी मानता है कि इन जादू टोना या काला जादू का असर कभी–कभी इंसानी ज़िंदगी पर पड़ जाता है. लेकिन इस्लाम की नजर में यह काम बिल्कुल हराम है, क्योंकि इसमें दूसरों को नुकसान पहुँचाने की नीयत होती है और कई घरों में फूट और बर्बादी इसी वजह से पैदा होती है. इसलिए इस्लाम ने काले जादू से पूरी तरह दूर रहने और लोगों को इससे बचाने की सख़्त हिदायत दी गई है. तो आइये जानते हैं मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना इफराहीम हुसैन से इस काले जादू के बारे मे अधिक जानकारी.

क्या सच में होता है काला जादू

जानकारी देते हुए अलीगढ़ के मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना इफराहीम हुसैन बताते हैं कि इस्लाम में जादू-टोना और ब्लैक मैजिक का कॉन्सेप्ट मौजूद है और यह कोई काल्पनिक बात नहीं है. कुरआन में भी सहर यानी जादू का ज़िक्र मिलता है, जिससे साबित होता है कि इसके असरात इंसान पर हो सकते हैं. कई बार जादू की वजह से इंसान के हालात, उसके रिश्ते, घर-परिवार, मिज़ाज और सेहत तक प्रभावित हो जाती है. यह बात इस्लाम मानता है कि अगर कोई इंसान जिन्नात या शैतानों की मदद से किसी दूसरे को नुकसान पहुँचाना चाहे, तो ऐसे असरात वाकई हो जाते हैं.

इस्लाम में है सजा

मौलाना का कहते हैं कि इस्लाम धर्म में ब्लैक मैजिक को बिल्कुल हराम और नाजायज़ करार दिया गया है. इसकी वजह यह है कि जादू में इंसान अल्लाह को छोड़कर शैतानों पर भरोसा करता है और यह तौहीद के खिलाफ अमल है. इस्लाम में इसकी सज़ा भी बहुत सख़्त बताई गई है. यहां तक कि जो शख्स जादू करता है या करवाता है, उसे क़ातिल जैसे गुनाह की सज़ा का मुस्तहिक माना गया है, क्योंकि वह दूसरों की ज़िंदगी, घर, रिश्ते और सुकून को बरबाद करने का ज़रिया बनता है.

काले जादू का मकसद

मौलाना का कहना है कि काला जादू असल में यह है कि कोई व्यक्ति जिन्नात या शैतानों से काम ले कर किसी इंसान को तकलीफ़ पहुँचाए, मियां-बीवी में फ़साद करवाए, किसी के घर में झगड़ा और नफ़रत डाले या किसी को आर्थिक, मानसिक या शारीरिक नुक़सान पहुँचाए. ऐसा इंसान इंसानियत को नुकसान पहुँचाता है, जबकि अल्लाह ने हुक्म दिया है कि लोगों को फायदा पहुँचाओ, न कि उनकी ज़िंदगी तबाह करो. इसी वजह से इस्लाम ने हर तरह के जादू और इसके ज़रिये नुकसान पहुँचाने को सख़्ती से मना किया है.

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