गन्ने के बेल्ट मेरठ में अब मखाने की खेती, किसानों की आय बढ़ाने की नई पहल
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Makhana Farming in Meerut: मेरठ में गन्ने के बाद अब ‘मखाना क्रांति’ की तैयारी है. जिला कृषि विभाग की पहल पर 11 प्रगतिशील किसानों ने बिहार के दरभंगा में मखाने की खेती का विशेष प्रशिक्षण लिया है. गन्ने में बढ़ते लाल सड़न रोग और पारंपरिक खेती की चुनौतियों को देखते हुए किसान अब ड्रैगन फ्रूट और स्ट्रॉबेरी के बाद मखाने की खेती से अपनी आय दोगुनी करेंगे. जिला प्रशासन बीज और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराकर मेरठ के खेतों में इस नई नकदी फसल को बढ़ावा दे रहा है.
मेरठ: क्रांतिधरा मेरठ, जिसे अब तक केवल गन्ने के मिठास और गेहूं की बालियों के लिए जाना जाता था, अब एक नई ‘सफेद क्रांति’ की ओर कदम बढ़ा रहा है. बदलते दौर के साथ मेरठ के प्रगतिशील किसान पारंपरिक खेती की सीमाओं को तोड़कर अब मखाने जैसी बेशकीमती फसल से अपनी किस्मत आजमाने को तैयार हैं. जिला प्रशासन और कृषि विभाग की इस अनूठी पहल से न केवल किसानों की आय दोगुनी होगी, बल्कि मेरठ के कृषि इतिहास में एक नया अध्याय भी जुड़ जाएगा. आइए जानते हैं कैसे तालाबों और पानी भरे खेतों के जरिए मेरठ के किसान अब ‘सुपरफूड’ मखाने की पैदावार करेंगे.
11 किसानों ने हासिल किया है विशेष प्रशिक्षण
जिला कृषि अधिकारी राजीव कुमार सिंह ने Local-18 की टीम से खास बातचीत करते हुए बताया कि पूर्व सांसद राजेंद्र अग्रवाल द्वारा मखाने से संबंधित खेती के लिए किसानों को प्रशिक्षण दिलाने का विषय रखा गया था. जिसके बाद जिलाधिकारी मेरठ के दिशा-निर्देशन में एक कमेटी का गठन हुआ. इसमें कुल 11 ऐसे किसानों का चयन किया गया, जिन्हें मखाने से संबंधित प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाना था. इन किसानों को बिहार के दरभंगा भेजा गया है, जहाँ वैज्ञानिकों द्वारा उन्हें मखाने की खेती की बारीकियों और विशेष तकनीक के बारे में प्रशिक्षित किया गया है. अब ये किसान मेरठ वापस आकर इस खेती की शुरुआत करेंगे.
किसानों के लिए क्यों फायदेमंद रहेगी यह खेती?
कृषि विभाग का मानना है कि वर्तमान समय की मांग है कि किसान खेती में विविधता अपनाएं. एक ही तरह की फसल पर निर्भर रहने से जोखिम बढ़ जाता है. वर्तमान में मेरठ के किसान बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती करते हैं, लेकिन गन्ने में लगने वाला ‘लाल सड़न रोग’ किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है. ऐसे में मखाने जैसी आधुनिक और नकदी फसल अपनाकर किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं और बीमारियों के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई कर सकते हैं.
विभाग हर कदम पर करेगा किसानों की मदद
जिला कृषि अधिकारी ने आश्वस्त किया कि जो किसान मखाने की खेती शुरू करेंगे, उन्हें केवल प्रशिक्षण ही नहीं बल्कि भविष्य में बीज और अन्य तकनीकी समस्याओं के समाधान में भी विभाग का पूरा सहयोग मिलेगा. उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में जरूरत पड़ी, तो दरभंगा से वैज्ञानिकों को भी मेरठ बुलाया जाएगा ताकि फसल में कोई कमी न रहे. मखाने की खेती के लिए खास तकनीक का इस्तेमाल होता है; इसे तालाबों में या फिर सामान्य खेत में 2 फीट पानी भरकर आसानी से किया जा सकता है.
नई फसलों की तरफ बढ़ रहा है मेरठ का रुझान
गौरतलब है कि मेरठ के किसान अब केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं हैं. यहाँ के खेतों में अब ड्रैगन फ्रूट, मशरूम और स्ट्रॉबेरी जैसी फसलों का रकबा बढ़ रहा है. अब इस सूची में मखाना भी शामिल होने जा रहा है. जब ये 11 किसान मखाने की सफल पैदावार करेंगे, तो अन्य किसानों का रुझान भी इस ओर बढ़ेगा, जिससे क्षेत्र में आर्थिक समृद्धि आएगी और किसान उन्नति की नई ऊंचाइयों को छुएंगे.
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें