गर्मी होते ही बढ़ी मधुमक्खी पालकों की मुसीबत, कुनबा टूटने का खतरा, ध्यान रखें ये बातें
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Bees Farming in Summer : मार्च में बढ़ती गर्मी ने मधुमक्खी पालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. तापमान में बढ़ोतरी से मधुमक्खियों के व्यवहार और उनके शहद उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है. लोकल 18 ने इस बारे में शाहजहांपुर के कृषि विशेषज्ञ डॉ. विमल कुमार से बात की. वे बताते हैं कि बढ़ते तापमान से मधुमक्खियों में ‘स्वार्मिंग’ और भोजन की कमी का खतरा बढ़ जाता है. इससे बचने के लिए किसानों को कुछ कदम उठाने होंगे. गर्मी में फूलों की कमी होने पर पालकों को वैकल्पिक भोजन तैयार करना पड़ेगा, वरना उत्पादन घट जाएगा.
शाहजहांपुर. मार्च में तेजी से बदल रहे मौसम का असर खेती और पशुपालन पर पड़ रहा है. बढ़ती गर्मी न केवल इंसानों और फसलों को प्रभावित कर रही है, बल्कि मधुमक्खी पालन से जुड़े किसानों के लिए भी तमाम बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं. कृषि एक्सपर्ट बताते हैं कि तापमान में बढ़ोतरी से मधुमक्खियों के व्यवहार और उनके शहद उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है. ऐसे में पालकों को सचेत रहने की जरूरत है. गर्मी के दौरान मधुमक्खियों में ‘स्वार्मिंग’ यानी विभाजन की समस्या बढ़ जाती है, जिससे बचने के लिए विशेष प्रबंधन और सावधानी की जरूरत है.
रॉयल जेली क्यों इतनी जरूरी
कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर में तैनात एक्सपर्ट डॉ. विमल कुमार लोकल 18 से बताते हैं कि गर्मी बढ़ते ही मधुमक्खियों में विभाजन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जिसे ‘स्वार्मिंग’ कहते हैं. ऐसा परिवार बढ़ने के कारण होता है या भोजन के अभाव में. मधुमक्खियों के जीवन में ‘रॉयल जेली’ का बहुत महत्त्व है, जो श्रमिक मक्खियों की ओर से रानी मक्खी तैयार करने के लिए उपयोग की जाती है. गर्मी में फूलों की कमी होने पर पालकों को वैकल्पिक भोजन के रूप में 50% चीनी के घोल का उपयोग करना चाहिए. हालांकि, यदि किसान सूरजमुखी या अन्य मौसमी फूल उगाएं, तो शहद की गुणवत्ता और बाजार मूल्य दोनों बेहतर बने रहेंगे.
बंट जाता है परिवार
गर्मी के मौसम में मधुमक्खियों के छत्ते में विभाजन एक प्राकृतिक लेकिन चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है. डॉ. विमल बताते हैं कि जब कुनबा बढ़ता है, तो 60:40 के अनुपात में परिवार विभाजित हो जाता है और पुरानी रानी मक्खी नए समूह के साथ चली जाती है. ऐसे में नई रानी तैयार करने के लिए श्रमिक मक्खियां भ्रूण अवस्था वाले कीटों को ‘रॉयल जेली’ खिलाती हैं. एक स्वस्थ छत्ते के लिए रानी मक्खी का सही प्रबंधन और उनके विकास पर नजर रखना जरूरी है.
चीनी का घोल क्यों ठीक नहीं
फूलों की कमी होने पर मधुमक्खियों को जीवित रखने के लिए चीनी का घोल देना पड़ता है. लेकिन डॉ. विमल कुमार चेतावनी देते हैं कि चीनी से बना शहद बाजार में अपनी विश्वसनीयता खो देता है और किसानों को उचित दाम नहीं मिलता है. इससे बचने के लिए वे सरसों की कटाई के बाद सूरजमुखी की खेती की कर लेनी चाहिए. यह प्राकृतिक आहार न केवल मधुमक्खियों को स्वस्थ रखता है, बल्कि शहद की बाजार वैल्यू भी बढ़ाता है.
तापमान नियंत्रण के लिए क्या
मधुमक्खियां अपने छत्ते को ठंडा रखने के लिए अद्भुत तकनीक अपनाती हैं. श्रमिक मक्खियां पानी की बूंदें लाकर अपने पंखों की मदद से छत्ते के अंदर हवा का संचार करती हैं. गर्मियों में छत्ते के डिब्बे में 10 के बजाय 9 फ्रेम ही रखने चाहिए. इससे मक्खियों को आवाजाही में आसानी होती है और हवा का प्रवाह बेहतर रहता है, जिससे मधुमक्खियां भीषण गर्मी में भी सुरक्षित रह सकती हैं और अपना जीवन निर्वाह कर सकती हैं.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें