गली-गली चना बेचकर खड़ा किया अपना साम्राज्य, 20 रुपए का स्वाद देकर बना ली लाखों की प्रापर्टी
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Ghazipur News: लोग अपनी मेहनत और लगन से छोटे से धंधे से भी लाखों की कमाई कर लेते हैं. ऐसी ही कहानी है गाजीपुर के रहने वाले राजेंद्र राजभर की. महज 15 साल की उम्र में हाथ में ठेला थामने वाले राजेंद्र ने आज इसी छोटे से बिजनेस से वो सब कुछ हासिल कर लिया है, जो किसी के लिए भी एक मिसाल है.
गाजीपुर: पूर्वी उत्तर प्रदेश में ‘चना जोर गरम’ सिर्फ एक स्नैक नहीं, बल्कि रोजमर्रा का हेल्दी स्नैक्स है. इसी स्वाद को गाजीपुर की गलियों में पिछले 35 सालों से पहुंचा रहे हैं राजेंद्र राजभर. महज 15 साल की उम्र में हाथ में ठेला थामने वाले राजेंद्र ने आज इसी छोटे से बिजनेस से वो सब कुछ हासिल कर लिया है, जो किसी के लिए भी एक मिसाल है.
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भी रहा जलवा
राजेंद्र राजभर बताते हैं कि उनकी यह यात्रा गाजीपुर से शुरू नहीं हुई थी. उन्होंने कई साल मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के शहरों में भी चना जोर गरम बेचा, लेकिन अपनी मिट्टी और घर की याद उन्हें वापस गाजीपुर खींच लाई. आज वे कासिमाबाद क्षेत्र के रहने वाले हैं और दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक अपनी साइकिल या ठेले के साथ गलियों में निकल जाते हैं.
एक ठेले से खरीदी 8 लाख की जमीन
राजेंद्र की कहानी उन लोगों के लिए जवाब है, जो छोटे काम को छोटा समझते हैं. राजेंद्र ने बताया कि वह दिनभर में 300 से 400 रुपये की बचत आसानी से कर लेते हैं. हर गली में कम से कम 10-12 लोग उनसे दाना भुजवाते या चना जोर गरम खाते हैं. इसी बचत से राजेंद्र ने करीब 7 से 8 लाख रुपये की जमीन खरीदी, जहां अब वे खेती भी करते हैं. उन्होंने बताया कि गांव के प्रधान ने उन्हें पैसे बचाने के लिए मोटिवेट किया था. आज उनके दो बच्चे हैं. एक 10वीं और दूसरा 12वीं में पढ़ रहा है, जिनकी पढ़ाई का पूरा खर्च इसी ‘चना जोर गरम’ से निकल रहा है.
क्या है राजेंद्र की भुजिया की खासियत?
राजेंद्र के अनुसार, वह भले ही पढ़े-लिखे नहीं हैं, लेकिन स्वाद के गणित में माहिर हैं. वे काले चने को भिगोकर, सुखाकर और फिर तलकर उसे चपटा करते हैं. परोसने से पहले पत्थर पर इन सारी चीजों को पिसते हैं. परोसते समय इसमें बारीक कटा प्याज, टमाटर, तीखी हरी मिर्च, नींबू का रस, चटपटी हरी चटनी और ऊपर से कुरकुरी सेव डालते हैं. 20 रुपये में मिलने वाला यह चटपटा स्वाद आज भी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.