गाजियाबाद: 4 बार टेंडर फिर भी कुत्तों को नहीं लगी चिप, अटकी नगर निगम की योजना

0
गाजियाबाद: 4 बार टेंडर फिर भी कुत्तों को नहीं लगी चिप, अटकी नगर निगम की योजना


Last Updated:

Ghaziabad News: शहर में आवारा कुत्तों की संख्या 65 हजार के पार पहुंच गई है, लेकिन 7 महीने में 4 बार टेंडर निकालने के बावजूद कोई एजेंसी काम लेने को तैयार नहीं. दरअसल, साल 2025 सितंबर महीने में गाजियाबाद नगर निगम ने डॉग्स में माइक्रोचिप लगाने की योजना बनाई थी. लेकिन यह योजना अभी तक जमीन पर नहीं उतर पाई. हालांकि, नगर निगम ने हाल ही में फिर से टेंडर जारी किया है. अधिकारियों को ऐसी उम्मीद है कि इस बार शायद कोई अनुभवी एजेंसी सामने आएगी.

Zoom

फोटो-AI

Ghaziabad News: गाजियाबाद को ‘स्मार्ट सिटी’ की राह पर ले जाने के लिए नगर निगम ने कुत्तों की डिजिटल मॉनिटरिंग का एक शानदार सपना देखा था. योजना थी कि शहर के हर आवारा और पालतू कुत्ते के शरीर में एक माइक्रोचिप डाली जाएगी, जिससे उसकी पूरी ‘कुंडली’ एक क्लिक पर मिल सके. लेकिन अफसोस, सात महीने बीत जाने के बाद भी यह योजना फाइलों से बाहर निकलकर जमीन पर नहीं उतर पाई है. नगर निगम ने चार बार टेंडर जारी किए, लेकिन हालात ऐसे हैं कि कोई भी बड़ी एजेंसी इस काम को हाथ में लेने को तैयार नहीं है.

तेजी से बढ़ रही है कुत्तों की संख्या
गाजियाबाद में आवारा कुत्तों की समस्या किसी से छिपी नहीं है. नगर निगम के 2021 के आंकड़ों पर नजर डालें तो शहर में करीब 48 हजार आवारा कुत्ते थे. लेकिन पिछले कुछ सालों में अब यह संख्या बढ़कर 60 से 65 हजार के बीच पहुंच गई है. बढ़ती आबादी के साथ डॉग बाइट की घटनाएं भी बढ़ी हैं. इसी समस्या के समाधान के लिए सितंबर 2025 में माइक्रोचिप लगाने की योजना बनाई गई थी, ताकि नसबंदी और वैक्सीनेशन का सही डेटा रखा जा सके.

क्यों फेल हो रहे हैं टेंडर?
नगर निगम ने अब तक चार बार टेंडर निकाले हैं, लेकिन एजेंसियों का रिस्पॉन्स बेहद निराशाजनक रहा. उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनुज के मुताबिक, जब पहली बार टेंडर जारी किया गया था, तो सिर्फ एक कंपनी ने दिलचस्पी दिखाई थी. उसके बाद दो बार टेंडर निकालने पर एक भी कंपनी सामने नहीं आई. निगम ने एक कुत्ते में चिप लगाने का खर्च 200 रुपये तय किया है, जिसे शायद कंपनियां काफी कम मान रही हैं.

एक्सपर्ट्स की राय: अनुभव की कमी और कम बजट
जानकारों का मानना है कि भारत में बड़े स्तर पर आवारा जानवरों को माइक्रोचिप लगाने का अनुभव रखने वाली कंपनियां न के बराबर हैं. देश में जहां भी यह काम हुआ है, वह केवल छोटे ‘पायलट प्रोजेक्ट’ के तौर पर हुआ है. इसके अलावा, इस प्रोजेक्ट की लागत ज्यादा है और निगम का बजट कम, यही वजह है कि बड़ी कंपनियां इसमें रुचि नहीं दिखा रही हैं.

क्या है माइक्रोचिप योजना और इसके फायदे?
नगर निगम का लक्ष्य शहर के हर कुत्ते को एक यूनिक आईडी देना है. इस आईडी को निगम के डेटाबेस से जोड़ा जाएगा. इसके मुख्य फायदे इस प्रकार होंगे…

  • पहचान और डेटा: कुत्ते की पहचान, वैक्सीनेशन और नसबंदी का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल होगा.
  • निगरानी: आवारा कुत्तों की सटीक संख्या का आकलन संभव होगा.
  • सुरक्षा: डॉग बाइट की घटना या किसी शिकायत की स्थिति में कुत्ते की तुरंत पहचान की जा सकेगी.
  • नसबंदी पर कंट्रोल: डेटा सही होने से नसबंदी कार्यक्रम को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

उम्मीद अभी बाकी है
नगर निगम ने हाल ही में फिर से टेंडर जारी किया है. अधिकारियों को उम्मीद है कि इस बार शायद कोई अनुभवी एजेंसी सामने आएगी. अगर यह योजना सफल होती है, तो गाजियाबाद आवारा कुत्तों के प्रबंधन में एक मिसाल पेश कर सकता है. लेकिन फिलहाल, शहरवासियों को इस ‘डिजिटल सुरक्षा’ के लिए और इंतजार करना होगा.

About the Author

authorimg

Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *