गुप्त मढ़ी, प्राचीन शिवलिंग और कभी न सूखने वाला कुआं, टांडा बादली का ऐतिहासिक मंदिर आज भी देता सकारात्मक ऊर्जा

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गुप्त मढ़ी, प्राचीन शिवलिंग और कभी न सूखने वाला कुआं, टांडा बादली का ऐतिहासिक मंदिर आज भी देता सकारात्मक ऊर्जा


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Rampur News: टांडा बादली में स्थित एक मंदिर काफी चमत्कारी है. मंदिर के संत राजीव बताते हैं कि यह मंदिर करीब तीन सदियों पुराना माना जाता है और इसके अंदर गुप्त मढ़ी भी है, जिसे बेहद पवित्र स्थान माना जाता है.

रामपुर: जिले के तहसील टांडा बादली में मुख्य सड़क किनारे स्थित 300 साल पुराना मढ़ी मंदिर अपनी ऐतिहासिक पहचान और गहरी आस्था के लिए जाना जाता है. रोजाना गुजरने वाले लोगों से लेकर दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं तक हर किसी की नजर इस प्राचीन मंदिर पर पड़ती है और लोग कुछ पल रुककर श्रद्धा के साथ यहां दर्शन करते हैं. सड़क से सटा होने की वजह से यह मंदिर हमेशा भक्तों से गुलजार रहता है और कई परिवार नियमित रूप से यहां मत्था टेकने पहुंचते हैं.

मंदिर के संत राजीव बताते हैं कि यह मंदिर करीब तीन सदियों पुराना माना जाता है और इसके अंदर गुप्त मढ़ी भी है, जिसे बेहद पवित्र स्थान माना जाता है. इसी मंदिर के अंदर सिद्ध बाबा की समाधि स्थापित है, जिसके प्रति लोगों की श्रद्धा सबसे ज्यादा है. संत राजीव के मुताबिक, ऋषिकेश, बद्रीनाथ, दिल्ली, हरियाणा और उत्तर भारत के कई हिस्सों से श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं. संत का कहना है कि यहां का वातावरण इतना आलोकित और शांत है कि कोई भी व्यक्ति कुछ देर यहां बैठकर आध्यात्मिक सुकून महसूस कर सकता है.

सिद्ध बाबा की समाधि देती है सकारात्मक ऊर्जा

भक्तों का कहना है कि इस मंदिर में जो भी निश्चय करके आता है, उसकी कामना जरूर पूरी होती है. मंदिर में दर्शन करने आए सूरजपाल बताते हैं कि उनकी मनोकामना पूरी होने के बाद वह हर साल काशीपुर से यहां दर्शन करने आते हैं. उनका कहना है कि सिद्ध बाबा की समाधि से उन्हें हमेशा एक सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और यही वजह है कि वे परिवार के साथ यहां नियमित आते हैं.

मंदिर की अनोखी महिमा

इतिहास की बात करें तो मंदिर परिसर में प्राचीन शिवलिंग भी स्थापित है, लोग बताते हैं कि यह शिवलिंग शुरुआत से यानी जब यहां कुछ भी नहीं था सिर्फ जंगल था, उसी समय से इसी स्थान पर विराजमान है और इसकी महिमा आज भी उतनी ही मानी जाती है. मंदिर के पास बना पुराना कुआं भी आकर्षण का केंद्र है, जिसमें आज भी जल मौजूद है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह कुआं कभी सूखा नहीं और इसे मंदिर की पवित्रता से जोड़ा जाता है.

संत का कहना है कि मंदिर के अंदर बनी गुप्त मढ़ी का महत्व सबसे अधिक है, क्योंकि इसे सिद्ध बाबा की तपस्थली माना जाता है. श्रद्धालु दीपक जलाकर यहां अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने की मन्नत मांगते हैं. टांडा बादली का यह मढ़ी मंदिर आज भी अपनी प्राचीनता, परंपरा और चमत्कारी मान्यताओं के लिए जाना जाता है चाहे दूर-दराज से यहां आने वाले श्रद्धालु हों या गांव के स्थानीय लोग, सभी के लिए यह मंदिर आस्था का बड़ा केंद्र है.

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

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टांडा बादली का ऐतिहासिक मढ़ी मंदिर, सिद्ध बाबा की समाधि की अनोखी कहानी



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