गोरखपुर विश्वविद्यालय में इन आठ सब्जियों पर हुआ रिसर्च
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Gorakhpur university news: डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. सिंह ने लोकल18 से बताया कि इस रिसर्च में छात्र-छात्राओं की भूमिका बेहद अहम है. “हमारा प्रयास है कि, पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों को प्रैक्टिकल नॉलेज भी मिले. इस रिसर्च में कई प्रोफेसर और रिसर्च गाइड भी लगातार छात्रों के साथ जुड़े हुए हैं. शुरुआती परिणाम काफी सकारात्मक हैं और हमें उम्मीद है कि, जल्द ही इसके ठोस नतीजे सामने आएंगे.
गोरखपुर: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (DDUG) का कृषि विभाग एक बार फिर किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आ रहा है. इस बार एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट में सब्जियों की 8 प्रमुख किस्मों पर विशेष रिसर्च चल रही है, जिसका सीधा फायदा आने वाले समय में किसानों को मिलने की उम्मीद है. यह रिसर्च न सिर्फ कम लागत में खेती को बढ़ावा देगी, बल्कि किसानों को बाजार में बेहतर विकल्प और मुनाफा भी दिला सकती है.
इन सब्जियों पर हो रहा रिसर्च
इस रिसर्च में ब्रोकली, फूल गोभी, पत्ता गोभी, बैंगन, टमाटर, मिर्च, बीन्स और प्याज जैसी रोजमर्रा की जरूरत वाली सब्जियों को शामिल किया गया है. इन सभी सब्जियों की उन्नत और अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों पर अलग-अलग छात्र और छात्राएं रिसर्च कर रहे हैं. उद्देश्य यह है कि, ऐसी वैरायटी विकसित की जाए, जो कम खर्च में अधिक पैदावार दे और स्थानीय जलवायु के अनुकूल भी हो. कृषि विभाग से जुड़े जानकार बताते हैं कि, मौजूदा समय में किसान बढ़ती लागत और घटते मुनाफे से परेशान हैं. ऐसे में यह रिसर्च किसानों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है. अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो इन सब्जियों की नई किस्में जल्द ही खेतों तक पहुंचेंगी और फिर बाजार में भी उपलब्ध होंगी.
छात्र-छात्राओं को मिलेगा प्रैक्टिकल नॉलेज
डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. सिंह ने लोकल18 से बताया कि इस रिसर्च में छात्र-छात्राओं की भूमिका बेहद अहम है. “हमारा प्रयास है कि, पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों को प्रैक्टिकल नॉलेज भी मिले. इस रिसर्च में कई प्रोफेसर और रिसर्च गाइड भी लगातार छात्रों के साथ जुड़े हुए हैं. शुरुआती परिणाम काफी सकारात्मक हैं और हमें उम्मीद है कि, जल्द ही इसके ठोस नतीजे सामने आएंगे.
खास बात यह है कि, इस रिसर्च को पूरी तरह किसान हित को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. नई किस्में रोग प्रतिरोधक हों, कम पानी में बेहतर उत्पादन दें और बाजार की मांग के अनुरूप हों इन सभी पहलुओं पर काम किया जा रहा है. आने वाले समय में जब ये सब्जियां खेतों और बाजारों में दिखेंगी, तब इस रिसर्च का असली असर भी नजर आएगा.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें