ग्राम सचिवालय बना शोपीस, ग्रामीण परेशान, खंडहर में तब्दील हो रहा है सरकारी भवन
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Ground Report: लखीमपुर खीरी जिले के बिजुआ ब्लॉक की ग्राम पंचायत गोविंदपुर में लाखों रुपए की लागत से बनाया गया ग्राम सचिवालय शोपीस बनकर रह गया है. ग्रामीणों की सुविधा और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के उद्देश्य से सचिवालय तैयार किया.आज उपेक्षा का शिकार है.
लखीमपुर खीरी जिले के बिजुआ ब्लॉक की ग्राम पंचायत गोविंदपुर में लाखों रुपए की लागत से बनाया गया ग्राम सचिवालय अब शोपीस बनकर रह गया है. ग्रामीणों की सुविधा और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के उद्देश्य से तैयार किया गया. यह सचिवालय आज उपेक्षा का शिकार है। प्रतिदिन सचिवालय का दरवाजा नहीं खुलता, जिसके चलते गांव के लोगों को छोटी-छोटी जानकारी या प्रमाण पत्र के लिए ग्राम प्रधान या सचिव के आफिसों के चक्कर लगाने पड़ते हैं.
सरकार की मंशा थी कि ग्रामीणों को ब्लॉक मुख्यालय तक न जाना पड़े और सभी सुविधाएं ग्राम सचिवालय से ही मिलें. लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है. ग्रामीण शिशुपाल ने बताया कि सचिवालय कभी-कभार ही खुलता है.ग्रामीणों को आय, जाति, निवास जैसे जरूरी प्रमाण पत्रों की जानकारी लेने में भारी परेशानी होती है. वहीं, दिलीप कुमार ने कहा कि यह सचिवालय जो कभी विकास का प्रतीक था, अब धीरे-धीरे खंडहर में बदलता जा रहा है. भवन का कुछ हिस्सा जर्जर भी हो चुका है, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा.
गांव में नहीं होती है नियमित सफाई
सिर्फ सचिवालय ही नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत में सफाई व्यवस्था भी बदहाल है. प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. सफाई कर्मियों की तैनाती के बावजूद गांव में नियमित सफाई नहीं होती.कूड़ा-कचरा और गंदगी से गांव का माहौल दूषित हो चुका है, जिससे बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार उन्होंने प्रधान और सचिव को शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. ग्रामीणों की यह स्थिति सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करती है. लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए सचिवालय और स्वच्छता अभियान की लापरवाही प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम है.अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन इस पर कब संज्ञान लेता है और ग्रामीणों को उनकी सुविधाओं का वास्तविक लाभ कब मिल पाता है