घर-दुकान से मंदिर तक भरोसा! अलीगढ़ का ये लॉक है सबकी पहली पसंद, कीमत ₹30 से 40 हजार तक
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Aligarh Lock Industry: आज के डिजिटल युग में जहां स्मार्ट लॉक का चलन बढ़ा है, वहीं अलीगढ़ का पारंपरिक पेडलॉक अपनी मजबूती की धाक आज भी जमाए हुए है. ताला नगरी के नाम से मशहूर अलीगढ़ का यह उद्योग अपनी सुरक्षा और भरोसे के लिए विश्व प्रसिद्ध है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि मशीनों के बजाय हाथों से तैयार होने वाले इन तालों में 4 से लेकर 18 लीवर तक का इस्तेमाल किया जाता है, जो इन्हें अभेद्य बना देता है. चाहे घर की सुरक्षा हो या अयोध्या जैसे भव्य मंदिरों के कपाट, अलीगढ़ का पेडलॉक ही भरोसे का दूसरा नाम है. लगभग 2000 करोड़ के सालाना टर्नओवर वाला यह कारोबार न केवल अलीगढ़ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, बल्कि भारत की हस्तशिल्प कला का एक बेमिसाल नमूना भी है.
अलीगढ़: उत्तर प्रदेश का अलीगढ़ जिला अपने ताला उद्योग के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. यहां के ताले सिर्फ दरवाजे ही नहीं बंद करते, बल्कि लोगों के विश्वास और सुरक्षा की गारंटी भी देते हैं. अलीगढ़ की ताला कंपनियां अपनी मजबूती के लिए नई-नई तकनीक अपनाती रहती हैं, ताकि यहां का ताला हर कसौटी पर खरा उतरे. चाहे घर के कीमती आभूषण हों या बड़े संस्थानों के गेट, सुरक्षा के लिए आज भी लोग अलीगढ़ के तालों पर ही भरोसा करते हैं. इस आधुनिक दौर में जहां सब कुछ मशीनी हो गया है, अलीगढ़ का एक खास ताला अपनी मजबूती और बनावट की वजह से आज भी चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसे ‘पेडलॉक’ के नाम से जाना जाता है.
1870 से शुरू हुआ सफर और 2000 करोड़ का कारोबार
अलीगढ़ में तालों का इतिहास बहुत पुराना और दिलचस्प है. इसकी शुरुआत 1870 में हुई थी जब इंगलैंड के एक व्यक्ति ने यहां कंपनी खोली थी. उस समय ताला बनाने का कच्चा माल इंगलैंड से आता था, लेकिन धीरे-धीरे अलीगढ़ के कारीगर इस काम में इतने माहिर हो गए कि आज यहां लगभग 9000 ताला इकाइयां काम कर रही हैं. अलीगढ़ के इस हार्डवेयर और ताला उद्योग से हर साल करीब 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा का व्यापार होता है. यहां न केवल ताले बल्कि पीतल की बेहतरीन कलाकृतियां भी बनाई जाती हैं, जो दुनिया भर में भेजी जाती हैं.
पेडलॉक, सुरक्षा की दृष्टि से सबसे परफेक्ट ताला
ताला कारोबारी मोहम्मद साजिद बताते हैं कि अलीगढ़ में तालों की पहचान ही ‘पेडलॉक’ से हुई है. यह एक ऐसा ताला है जो सुरक्षा के मामले में सबसे भरोसेमंद माना जाता है. चाहे कोई बड़ा मंदिर हो, गुरुद्वारा, दुकान या घर का गोदाम, अगर सुरक्षा की बात आती है तो सबसे पहले पेडलॉक का ही नाम लिया जाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह हाथों से तैयार किया जाता है, इसमें मशीनों का बहुत कम इस्तेमाल होता है. हाथ की कारीगरी ही इसे मशीनी तालों के मुकाबले कहीं ज्यादा मजबूत और टिकाऊ बनाती है.
4 लीवर से 18 लीवर तक की मजबूती
इस ताले की मजबूती का राज इसके अंदर लगने वाले ‘लीवर’ हैं. मोहम्मद साजिद के अनुसार, पेडलॉक 4 लीवर से शुरू होकर 18 लीवर तक के बनाए जाते हैं. जितने ज्यादा लीवर, ताला उतना ही सुरक्षित. अयोध्या के राम मंदिर में भी अलीगढ़ का यही मजबूत ताला भेजा गया है. यह ताला हर साइज में उपलब्ध है; इसे 10 ग्राम के छोटे साइज से लेकर 100 किलो तक के विशालकाय वजन में बनाया जा सकता है. इसकी कीमत की बात करें तो एक छोटा पेडलॉक 30 रुपये से शुरू होता है और बड़े पेडलॉक की कीमत 40,000 रुपये से भी ज्यादा तक जाती है.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें