चंद्रिका धाम से धूरि जट रौद्र धाम तक, सुल्तानपुर की ये धरोहरें क्यों हैं खास?
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सुल्तानपुर जिले के ऐंजर और दिखौली गांव में स्थित प्राचीन मंदिर अपने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के लिए जाने जाते हैं. यहां मौजूद हजार साल पुरानी खंडित मूर्तियां इस स्थान को एक महत्वपूर्ण सनातन धरोहर बनाती हैं, जहां आज भी श्रद्धालु आस्था के साथ पहुंचते हैं.
सुल्तानपुर जिले में कई ऐसे प्राचीन स्थल हैं जहां खंडित मूर्तियां मौजूद हैं. इन्हीं में से एक मंदिर सुल्तानपुर शहर से लगभग 7 किलोमीटर दूर दिखौली ग्राम सभा में भी स्थित है. दिखौली ग्रामसभा में स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर ‘धूरि जट रौद्र धाम’ के नाम से प्रसिद्ध है, जहां भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

धूरि जट रौद्र धाम के नाम से प्रसिद्ध यह प्राचीन मंदिर अपने ऐतिहासिक महत्व के कारण सुल्तानपुर की धरोहर में शामिल है, क्योंकि लगभग कई हजार साल पुरानी खंडित मूर्तियां मंदिर परिसर में आज भी मौजूद हैं. दिखौली ग्रामसभा के स्थानीय निवासी सुधीर कुमार सिंह ने लोकल 18 को बताया कि इन मूर्तियों को औरंगजेब ने तुड़वाया था, जिससे सनातन धर्म और संस्कृति को नष्ट किया जा सके.

मंदिर के संरक्षक विपेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि इस मंदिर में स्थित शिवलिंग की स्थापना नहीं करवाई गई थी, बल्कि यह शिवलिंग स्वयं से उत्पन्न हुआ था. इसकी आयु ज्ञात करने के लिए 11 वर्ष पहले कार्बन डेटिंग की प्रक्रिया अपनाई गई, लेकिन इसके बावजूद शिवलिंग की गहराई और आयु का पता नहीं चल सका.
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मंदिर के पुजारी प्रभाकर दास जी महाराज के मुताबिक यह मंदिर प्राचीन काल का है. इस मंदिर का इतिहास सनातन से चला आ रहा है क्योंकि उनका मानना है कि मां दुर्गा के 108 नाम में 104 नंबर पर परमेश्वरी देवी का नाम आता है. यहां पर खंडित मूर्तियां इस बात का प्रमाण हैं कि इस मंदिर का इतिहास काफी प्राचीन है. मंदिर का बाहरी आवरण 1914 में पुनर्निर्माण के दौरान बनाया गया था.

गांव के लोग बताते हैं कि यह एक प्राचीन मंदिर हुआ करता था. यहां कई देवी-देवताओं की मूर्तियां थीं, लेकिन मुगल काल के दौरान कई मंदिरों को नुकसान पहुंचाया गया. इसी क्रम में माता परमेश्वरी धाम भी प्रभावित हुआ. ग्रामीणों के अनुसार यहां स्थापित मूर्तियों को खंडित कर बगल के तालाब में फेंक दिया गया था.

इस मंदिर के बगल में एक तालाब भी स्थित है. ग्रामीणों के अनुसार जब इस तालाब की खुदाई की गई थी, तब यहां से कई खंडित मूर्तियां मिली थीं. स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाब की खुदाई के दौरान आज भी कभी-कभी मूर्तियां मिल जाती हैं. इन खंडित मूर्तियों की प्राचीनता का अंदाजा उनकी नक्काशी और देवी-देवताओं की आकृतियों से लगाया जाता है, जो कई सौ वर्ष पुरानी मानी जाती हैं.

सुल्तानपुर के ऐंजर गांव में स्थित लगभग हजार वर्ष पुरानी खंडित मूर्तियां मंदिर परिसर में आज भी मौजूद हैं. धनपतगंज ब्लॉक की ऐंजर ग्रामसभा के स्थानीय निवासी रामचंद्र तिवारी ने लोकल 18 को बताया कि इन मूर्तियों को मुगलों ने तुड़वाया था, जिससे सनातन धर्म और संस्कृति को नष्ट किया जा सके. कुछ वर्ष पहले ग्रामीणों की मदद से इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया गया. आपको बता दें कि इस प्राचीन चंद्रिका धाम में ऐंजर गांव की सभी जातियों के लोग पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.

ग्रामीणों के मुताबिक यह मंदिर 1000 साल से भी अधिक पुराना है. यहां पड़ी खंडित मूर्तियां इस मंदिर की ऐतिहासिक पहचान का प्रमाण देती हैं.