चचेरे भाई से 15000 का कर्ज लेकर शुरू किया कारोबार, आज ये शख्स शोरूम का मालिक

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चचेरे भाई से 15000 का कर्ज लेकर शुरू किया कारोबार, आज ये शख्स शोरूम का मालिक


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Success Story: कहते हैं कि कुछ करने की इच्छा हो, तो सफलता खुद-ब-खुद दौड़ी चली आती है. कुछ ऐसी ही कहानी मऊ निवासी विक्की गुप्ता की है, जिन्होंने उधारी से अपना कारोबार शुरू किया और आज अच्छी-खासी शोरूम के मालिक हैं. आइए उनकी सफलता की कहानी आपको बताते हैं.

मऊ: कहते हैं कि यदि हौसला बुलंद हो तो कोई भी काम कठिन नहीं होता. मऊ जनपद के मुहम्मदाबाद गोहना नगर पंचायत के गोलवार टोला में 1 जनवरी 1988 को चंद्रभूषण प्रसाद के घर जन्मे विक्की गुप्ता की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जो खुद आत्मनिर्भर बने ही और अपने साथ 6 अन्य लोगों को रोजगार दे रहे हैं. आइए उनकी पूरी कहानी और सफलता की स्टोरी जानते हैं.

लोकल 18 से खास बातचीत करते हुए विक्की गुप्ता बताते हैं कि शुरू में उनका मन नौकरी करने का था, लेकिन नौकरी करने का सपना पूरा नहीं हुआ. परिवार की स्थिति ठीक नहीं थी, तो दोस्त ने एक आईडिया दिया कि क्यों ना वह जूते चप्पल की दुकान करें. लेकिन परिवार की स्थिति ठीक नहीं थी, इसलिए दुकान नहीं कर पा रहे थे.

चचेरा भाई बना सहारा
इसी बीच उनके एक चचेरे भाई चंदन गुप्ता उनका सहारा बने और 15000 रुपए उन्हें कर्ज के रूप में दिया. 15000 रुपए की लागत से उन्होंने जूते-चप्पल की दुकान का शुभारंभ किया और आज धीरे-धीरे छोटी सी दुकान को शोरूम में तब्दील कर दिया है.

अपने सहयोग से 6 से 7 लोगों को भेज चुके हैं विदेश
विक्की गुप्ता बताते हैं कि पढ़ाई के दौरान ही उनके घर की स्थिति मजबूत नहीं थी. उन्होंने चचेरे भाई से 15000 रुपए कर्ज लेकर जूते-चप्पल की दुकान डाल दी और पढ़ाई के साथ-साथ वह दुकान भी चलाते थे. धीरे-धीरे वह दुकान को बढ़ाते गए और अपने यहां अन्य लोगों को नौकरी देते गए.

हालांकि उनके दुकान का यह नियम रहा है कि जो भी युवक उनके दुकान पर काम करने आता है, उसे वह कुछ आर्थिक मदद करके और कुछ सहयोग करके विदेश भेजने का काम करते हैं. इससे उनके यहां काम करने वाला युवक अपने पैरों पर खड़ा हो सके और आगे अपना भी कोई कार्य कर सके. आज तक वह 6 से 7 लोगों को विदेश भेज चुके हैं, जो उनके यहां पहले काम करते थे.

2005 में कर्ज लेकर शुरू की दुकान
आज भी उनके दुकान पर 6 से 7 वर्कर काम कर रहे हैं. हालांकि 2005 में वह चचेरे भाई से 15000 रुपए कर्ज लेकर दुकान की शुरुआत किए थे और धीरे-धीरे अब वह छोटी सी दुकान शोरूम में तब्दील हो गई है और वहां 6 से 7 लोग काम करते हैं. खास बात यह है कि उनके इस शोरूम में हर ब्रांड के शूज और चप्पल मिलते हैं. यही वजह है कि उनकी शोरूम पर हमेशा भीड़ लगी रहती है. क्वालिटी से वह कभी समझौता नहीं करते, इस वजह से एक बार जो उनके शोरूम से सामान लेकर जाता है, वह हमेशा उन्हीं के यहां आता है.

वर्करों को रोजगार के साथ दी जाती ट्रेनिंग
विक्की गुप्ता बताते हैं कि उनके यहां काम करने वाले वर्करों को वह ऐसी ट्रेनिंग देते हैं कि किसी भी मार्केट में वह आसानी से मजबूती के साथ काम कर सके और खड़े हो सके. उनकी इच्छा अनुसार, वह अपने यहां काम करने वाले लड़कों को विदेश भेजने हैं. वह कोशिश करते हैं कि उनके यहां काम करने वाला लड़का जहां भी जाकर कम करे, मजबूती के साथ काम करें. उनके शोरूम पर काम के साथ ट्रेनिंग भी दी जाती है, जिससे काम करने वाला आसानी से काम कर सके. आज वह अपने क्षेत्र में युवाओं के लिए मॉडल रोल बने हुए हैं.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.



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