चित्रकूट में ईको टूरिज्म की नई उड़ान: पीपीपी मॉडल पर विकसित होगी रामनगर झील, धार्मिक पर्यटन के साथ मिलेगा लोगों को रोजगार

0
चित्रकूट में ईको टूरिज्म की नई उड़ान: पीपीपी मॉडल पर विकसित होगी रामनगर झील, धार्मिक पर्यटन के साथ मिलेगा लोगों को रोजगार


Last Updated:

उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड ने प्रदेश के 10 प्रमुख ईको टूरिज्म स्थलों को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर संचालित, संरक्षित और विकसित करने का निर्णय लिया है. बोर्ड ने इच्छुक संस्थाओं, कंपनियों और एजेंसियों से 27 फरवरी तक प्रस्ताव ऑनलाइन मांगे हैं. चयनित एजेंसियों को इन परियोजनाओं का संचालन पहले 15 वर्षों के लिए सौंपा जाएगा.

धर्म नगरी चित्रकूट जिसे भगवान श्रीराम की तपोस्थली के रूप में जाना जाता है, अब धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ ईको पर्यटन की दिशा में भी कदम बढ़ा रहा है. चित्रकूट में इको पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है, जिसके तहत रामनगर झील को पीपीपी मॉडल पर विकसित कर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाया जा रहा है,आने वाले समय में यहां मठ-मंदिरों की परिक्रमा करने वाले श्रद्धालु प्राकृतिक सौंदर्य का भी आनंद ले सकेंगे.

ऐसे करें आवेदन

बता दें कि इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड ने प्रदेश के 10 प्रमुख ईको टूरिज्म स्थलों को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर संचालित, संरक्षित और विकसित करने का निर्णय लिया है. बोर्ड ने इच्छुक संस्थाओं, कंपनियों और एजेंसियों से 27 फरवरी तक प्रस्ताव ऑनलाइन मांगे हैं. चयनित एजेंसियों को इन परियोजनाओं का संचालन पहले 15 वर्षों के लिए सौंपा जाएगा. इच्छुक अभ्यर्थी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट https://upecoboard.up.go के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. चित्रकूट की रामनगर झील को करीब 4 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है.

पर्यटन अधिकारी ने दी जानकारी 

पर्यटन अधिकारी आरके रावत ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि यह झील अब सिर्फ एक प्राकृतिक जलाशय नहीं रहेगी, बल्कि एक समग्र पर्यटन स्थल के रूप में उभरेगी.यहां बोटिंग की सुविधा, आकर्षक पाथवे, सुंदर गार्डन, बैठने की व्यवस्थित व्यवस्था, बच्चों के लिए खुला क्षेत्र और रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण में सुकून भरे पल बिताने का अवसर मिलेगा. चित्रकूट में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु कामतानाथ परिक्रमा और अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन अब उन्हें प्रकृति के बीच समय बिताने का भी विकल्प मिलेगा.

लोगों को मिलेगा रोजगार

उन्होंने आगे की जानकारी में बताया कि रामनगर झील परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और मार्च तक इसे शुरू करने की तैयारी है, उनका मानना है कि परियोजना शुरू होने के बाद यहां पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. पीपीपी मॉडल के तहत इस परियोजना का संचालन निजी एजेंसी द्वारा किया जाएगा, जिससे सुविधाओं की गुणवत्ता और रखरखाव बेहतर तरीके से सुनिश्चित हो सकेगा. स्थानीय स्तर पर भी इससे रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है और क्षेत्र के लोगों का रोजगार भी बढ़ेगा.

About the Author

Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हो सकता है आप चूक गए हों