चुटकियों में निकलेगा कान का मैल, दादी-नानी के नुस्खे हैं आज भी हैं कारगर
जौनपुर: कान हमारे शरीर का एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण अंग है, लेकिन अक्सर इसकी साफ-सफाई को लेकर लोग या तो लापरवाही बरतते हैं या फिर गलत तरीकों का इस्तेमाल कर लेते हैं. इससे कान में दर्द, खुजली, मैल जमना, सुनने की क्षमता कम होना जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. इसी विषय पर आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. कुसुम पांडेय ने दादी-नानी के पुराने, आजमाए हुए और आयुर्वेदिक नुस्खों की जानकारी दी है, जो आज भी उतने ही उपयोगी हैं.
ईयरवैक्स करता है कान की हिफाजत
डॉ. कुसुम पांडेय के ने बताया कि सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि कान का मैल (ईयरवैक्स) पूरी तरह खराब नहीं होता. यह कान के अंदरूनी हिस्से को धूल, कीटाणु और संक्रमण से बचाने का काम करता है. समस्या तब होती है जब यह जरूरत से ज्यादा जम जाए या गलत तरीके से साफ किया जाए. लोग अक्सर माचिस की तीली, पिन या नुकीली चीजों से कान साफ करने लगते हैं, जो बेहद खतरनाक हो सकता है.
कैसे हटाएं कान का मैल
दादी-नानी के नुस्खों में सबसे पहला और सुरक्षित उपाय है गुनगुना सरसों का तेल. सप्ताह में एक बार रात को सोने से पहले 2-3 बूंद गुनगुना सरसों का तेल कान में डालने से मैल नरम हो जाता है और धीरे-धीरे बाहर आ जाता है. इससे कान का सूखापन भी दूर होता है.
दूसरा असरदार नुस्खा है लहसुन का तेल. आयुर्वेद में लहसुन को प्राकृतिक एंटीबायोटिक माना गया है. लहसुन की 2-3 कलियों को सरसों के तेल में पकाकर छान लें और ठंडा होने पर इसकी 1-2 बूंद कान में डालें. यह कान के दर्द और हल्के संक्रमण में लाभकारी होता है.
डॉ. पांडेय बताती हैं कि नीम का तेल भी कान की सफाई और संक्रमण से बचाव में उपयोगी है. अगर कान में खुजली या बार-बार पानी जाने से परेशानी हो, तो नीम तेल की 1-2 बूंद काफी राहत देती है.
कान में दर्द होने पर डॉक्टर से लें सलाह
इसके अलावा, रोज नहाते समय कान के बाहरी हिस्से को साफ कपड़े से हल्के हाथ से पोंछना चाहिए. कान के अंदर गहराई तक कुछ भी डालने से बचना चाहिए. अगर बार-बार दर्द, सुनाई कम देना या पानी जैसा स्राव हो, तो घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहते हुए तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.
दादी-नानी के ये सरल आयुर्वेदिक उपाय सुरक्षित हैं, लेकिन इन्हें सही तरीके और सीमित मात्रा में ही अपनाना चाहिए, ताकि कान हमेशा स्वस्थ और सुरक्षित रहें.