जिस धागे से उड़ती थीं पतंगें, उसी ने छीन ली हजारों कारीगरों की रोजी-रोटी!

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जिस धागे से उड़ती थीं पतंगें, उसी ने छीन ली हजारों कारीगरों की रोजी-रोटी!


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45 हजार मांझा कारीगर है. और लगभग 10 हजार मांझा बनाने के अड्डे लगते है. मांझा बनाने वाले कारीगर सौ-सौ रूपये लेकर गुजारा कर रहे हैं. बरेली में मांझा का काम बंद हुए एक सप्ताह हो गया इसमें लगभग साढ़े तीन करोड़ का न…और पढ़ें

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मांझा कारोबारियों पर छाया रोजी रोटी का संकट.

हाइलाइट्स

  • बरेली में मांझा निर्माण पर रोक से हजारों परिवार प्रभावित.
  • विस्फोट के बाद प्रशासन ने मांझा निर्माण पर सख्ती बढ़ाई.
  • कारीगर प्रशासन से काम शुरू करने की अनुमति मांग रहे हैं.

बरेली: हाल ही में बरेली के बाकरगंज इलाके में एक मांझा कारखाने में हुए विस्फोट ने सनसनी फैला दी. इस हादसे में तीन कारीगरों की दर्दनाक मौत हो गई थी. घटना के बाद प्रशासन ने मांझा बनाने वालों पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी, जिससे हजारों कारीगरों की रोजी-रोटी पर संकट आ गया है.
बरेली में करीब 45 हजार लोग मांझा बनाने के काम से जुड़े हैं और लगभग 10 हजार छोटे-बड़े अड्डों पर इसका उत्पादन होता है. विस्फोट के बाद प्रशासन ने मांझा निर्माण पर रोक लगा दी है, जिससे हजारों परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं.
वर्धमान ट्रेडर्स कंपनी के सेल्स मैनेजर राकेश श्रीवास्तव का कहना है कि पिछले एक हफ्ते से मांझा बनाने का काम बंद है, जिससे धागे की सप्लाई भी रुक गई है. इससे कारोबार को लगभग 80 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है.

मिले काम शुरू करने की परमिशन
करीब 32 साल से मांझा बनाने वाले इरशाद अली का कहना है कि वे चावल, गेरू और अन्य पारंपरिक सामग्रियों से मांझा तैयार करते हैं, जिसमें कोई खतरनाक केमिकल नहीं होता. वे प्रशासन से अपील कर रहे हैं कि उन्हें दोबारा काम करने की अनुमति दी जाए, ताकि उनके परिवारों की रोजी-रोटी चल सके.
वहीं, मांझा निर्माता अरशद हुसैन, जो 45 साल से इस कारोबार से जुड़े हैं, का कहना है कि अब तक कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ था. लेकिन इस विस्फोट के बाद प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी, जिससे अब हजारों लोग बेरोजगार हो गए हैं.

नायलॉन मांझे ने छीना कारोबार
मांझा निर्माता अतीक अहमद का कहना है कि असली खतरा नायलॉन के मांझे से है, जिसे प्रतिबंध के बावजूद चोरी-छिपे बेचा जा रहा है. उनका दावा है कि वे केवल सूती धागे पर पत्थर और केमिकल का लेप लगाकर पारंपरिक मांझा बनाते हैं, जो सुरक्षित होता है.

प्रशासन की कार्रवाई जारी
पुलिस विभाग ने अब इस पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है. कारीगरों का कहना है कि जांच जल्दी पूरी हो और उन्हें फिर से काम करने की अनुमति दी जाए, ताकि वे अपने परिवार का खर्च चला सकें.

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