ट्रांजिशन फेज में आडू की फसल, थोड़ी सी चूक घातक, बोरान का छिड़काव जरूरी, एक्सपर्ट से जानें
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Peach Orchard Farming : आडू की फसल अब ‘ट्रांजिशन फेज’ में है. इसे देखते हुए उद्यान विभाग ने किसानों के लिए विशेष गाइडलाइन जारी कर सिंचाई, पोषण और कीट नियंत्रण के सटीक तरीके बताए हैं. उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार पाठक लोकल 18 से कहते हैं कि गुणवत्तापूर्ण पैदावार के लिए बॉल टेस्ट, बोरान के छिड़काव और जैविक कीटनाशकों का प्रयोग जरूरी है. पोषण प्रबंधन के लिए एनपीके की सही मात्रा के साथ -साथ बोरान का छिड़काव भी करना चाहिए.
शाहजहांपुर. उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में आडू की खेती करने वाले किसानों के लिए जिला उद्यान विभाग ने गाइडलाइन जारी की है. वर्तमान में आडू की फसल फूल से फल बनने के ‘ट्रांजिशन फेज’ में है. इस दौरान फसलों को कीटों से बचाने और पोषण प्रबंधन की बारीकियों को समझना बेहद जरूरी है. जिला उद्यान अधिकारी ने किसानों को सिंचाई के सटीक तरीकों और जैविक कीटनाशकों के प्रयोग पर जोर देने को कहा है, ताकि फलों की गुणवत्ता बनी रहे और पैदावार में बढ़ोतरी हो सके. जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार पाठक ने बताया कि आडू के बागवानों को इस समय सिंचाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए. न तो खेत में अत्यधिक नमी हो और न ही पानी की कमी हो पाई. इसके लिए ‘बॉल टेस्ट’ यानी मिट्टी का गोला बनाकर उसकी नमी जांचने का सबसे सटीक तरीका है. पोषण प्रबंधन के लिए एनपीके की सही मात्रा के साथ-साथ बोरान का छिड़काव 2 ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से करना चाहिए. कीटों के हमले की स्थिति में इमिडाक्लोप्रिड और नीम ऑयल का प्रयोग प्रभावी रहता है.
सिंचाई में लापरवाही के नुकसान
फसलों की सिंचाई करते समय ‘फील्ड कैपेसिटी’ का ध्यान रखना सबसे महत्त्वपूर्ण है. किसानों को मिट्टी हाथ में लेकर देखनी चाहिए, यदि उसका गोला आसानी से बन जाता है, तो नमी का स्तर ठीक है, सिंचाई की जरूरत नहीं है. ज्यादा सिंचाई से फल गिरने की समस्या बढ़ सकती है, जो सीधे मुनाफे पर असर डालती है. बागों को खरपतवार और झाड़ियों से मुक्त रखना भी जरूरी है ताकि पौधों को भरपूर पोषण मिले.
इतनी मात्रा जरूरी
पौधों को स्वस्थ रखने के लिए एनपीके के अलावा बोरान का छिड़काव फल की गुणवत्ता सुधारने में मदद करता है. अगर बाग में कीटों का प्रभाव दिखे, तो 0.5 मिलीलीटर इमिडाक्लोप्रिड प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें. इसके अलावा, नीम ऑयल एक बेहतरीन और प्रभावी जैव-कीटनाशक है, जिसका 4 मिलीलीटर प्रति लीटर के हिसाब से प्रयोग किया जा सकता है. यह न केवल कीटों को नियंत्रित करता है बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी है.
कमजोर पौधों के लिए
आडू के बागों में अक्सर कुछ पौधे शारीरिक रूप से कमजोर रह जाते हैं या फलों के भार से झुकने लगते हैं. ऐसे पौधों को डंडे या किसी अन्य मजबूत वस्तु का सहारा देना चाहिए. इससे पौधों के तने फटने या टूटने का खतरा कम हो जाता है. नियमित देखभाल और सही समय पर दी गई यह सुरक्षा न केवल पेड़ की उम्र बढ़ाती है, बल्कि आने वाले समय में किसान को भरपूर और स्वस्थ फसल का लाभ भी सुनिश्चित करती है.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें