ट्रेंच और रिंग विधि में क्या अंतर? जानें गन्ना किसानों के लिए कौन वाली बेस्ट
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Trench and Ring Method Sugarcane Farming : यूपी में किसान भाई गन्ने की बुवाई में जुटे हुए हैं. गन्ना किसानों के बीच ट्रेंच विधि और रिंग विधि काफी लोकप्रिय हो रही है. इन तरीकों से खेती करने पर पैदावार बढ़ती है. पानी और खाद की भी बचत होती है. लोकल 18 से गोंडा के किसान भैरव वर्मा बताते हैं कि ट्रेंच विधि में खेत में लंबी-लंबी खाइयां (नालियां) बनाई जाती हैं. रिंग विधि में खेत में गोल आकार (रिंग) बनाकर गन्ने की बुवाई की जाती है. ट्रेंच में पानी की बचत ज्यादा होती है, जबकि रिंग में पौधों की देखभाल आसान रहती है.
गोंडा. उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ नई तकनीकों को अपनाकर बेहतर उत्पादन और मुनाफा कमा रहे हैं. खासतौर पर गन्ने की खेती में ट्रेंच विधि और रिंग विधि काफी लोकप्रिय हो रही है. इन दोनों तरीकों से खेती करने पर पैदावार बढ़ती है और पानी व खाद की भी बचत होती है. लोकल 18 से गोंडा के प्रगतिशील किसान भैरव वर्मा बताते हैं कि ट्रेंच विधि में खेत में लंबी-लंबी खाइयां (नालियां) बनाई जाती हैं. इन खाइयों की गहराई 20-25 सेंटीमीटर होती है और इनके बीच की दूरी 3 से 4 फीट रखी जाती है. गन्ने के बीज (सेट) को इन नालियां में लगाया जाता है और ऊपर से मिट्टी डाल दी जाती है.
किसान भैरव बताते हैं कि इस विधि का फायदा यह है कि पानी सीधे जड़ों तक पहुंचता है, जिससे पौधा मजबूत होता है. खरपतवार (घास-फूस) भी कम उगते हैं. इस विधि से गन्ना मोटा और लंबा होता है, जिससे उत्पादन बढ़ जाता है.
कम खेत वालों के लिए ये तरीका बेस्ट
किसान भैरव वर्मा के मुताबिक, रिंग विधि में खेत में गोल आकार (रिंग) बनाकर गन्ने की बुवाई की जाती है. हर रिंग में 8-10 सेट लगाए जाते हैं और इनके बीच उचित दूरी रखी जाती है. यह विधि खासतौर पर उन किसानों के लिए अच्छी मानी जाती है जिनके पास सीमित जगह होती है या जो ज्यादा देखभाल के साथ खेती करना चाहते हैं. इसमें पौधों को चारों तरफ से बराबर पोषण मिलता है और हवा भी अच्छी तरह लगती है. इससे पौधे स्वस्थ रहते हैं और बीमारी का खतरा कम होता है.
कितनी पैदावार ज्यादा
किसान भैरव वर्मा बताते हैं कि ट्रेंच विधि में गन्ना सीधी लाइनों में नालियां के अंदर लगाया जाता है, जबकि रिंग विधि में गोल आकार में पौधे लगाए जाते हैं. ट्रेंच विधि बड़े खेतों के लिए ज्यादा उपयुक्त है, रिंग विधि छोटे और सीमित क्षेत्र के लिए बेहतर मानी जाती है. ट्रेंच में पानी की बचत ज्यादा होती है, जबकि रिंग में पौधों की देखभाल आसान रहती है. अगर सही तरीके से इन विधियों को अपनाया जाए, तो गन्ने की पैदावार में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है. लागत भी कम आती है और मुनाफा बढ़ता है.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें