ट्रॉली सिस्टम से ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहा 23 साल का ये किसान, ये तरीका कम जमीन वालों के लिए वरदान
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Dragon Fruit Farming : ये फल आमतौर पर दक्षिण भारत और गर्म इलाकों में उगाया जाता है, लेकिन गोडा के अंकित कुमार मेहनत और सही तकनीक के दम पर यूपी में इसकी खेती कर रहे हैं. अच्छे नतीजे देखकर उन्होंने खेती का विस्तार किया और अब तक सैकड़ों पौधे रोप चुके हैं. उन्होंने एक ऐसा मैथेड चुना जो दूसरे किसानों से बहुत अलग है. इसमें कम जगह में ज्यादा पौधे आसानी से लगाए जा सकते हैं.
गोंडा. खेती में नए-नए प्रयोग करने वाले युवाओं की संख्या बढ़ रही है. इसी कड़ी में गोंडा जिले के एक युवा किसान ने ड्रैगन फ्रूट की खेती को एक नए और आधुनिक तरीके से शुरू किया है. यह तरीका है ट्रॉली सिस्टम, जिसके जरिए कम जगह में ज्यादा और बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है. यह तरीका जिले में पहली बार अपनाया गया है, जिससे ये किसान काफी चर्चा में है. लोकल 18 से बातचीत में प्रगतिशील किसान अंकित वर्मा बताते हैं कि ट्रॉली सिस्टम एक आधुनिक तकनीक है जिसमें ड्रैगन फ्रूट के पौधों को खंबे के सहारे न खड़ा करके 5 इंच मोटे लोहे के रॉड या सरिया के सहारे लगाकर कतार में लगाया जाता है. उसके बाद ऊपर से एक सरिया या रॉड के सहारे ड्रैगन फ्रूट के पौधे को रोका जाता है.
कहां से आया आइडिया
अंकित वर्मा बताते हैं कि उन्होंने हाई स्कूल तक की पढ़ाई की. फिर घर की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो जाने के कारण उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और बेंगलुरु में जाकर गाड़ी चलाने लगे. अंकित बताते हैं कि उन्होंने जब पढ़ाई छोड़ी तब उनकी उम्र 17 साल थी. इस समय वे 23 साल के हैं. अंकित वर्मा बताते हैं कि बेंगलुरु में गाड़ी चलाने के दौरान इधर-उधर आना-जाना लगा रहता था. उसी दौरान हरियाणा का एक किसान मिला जो ट्राली सिस्टम से ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहा था. मैंने उस किसान से बात की और काफी रिसर्च की उसके बाद गोंडा में पहली बार ट्रॉली सिस्टम से ड्रैगन फ्रूट उगाने शुरू किए.
इसमें क्या फायदा
ट्रॉली सिस्टम में दो-दो फीट पर दो-दो पौधे लगाए जाते हैं. अगर आप रिंग विधि से ड्रैगन फूड की खेती करते हैं तो उसमें एक रिंग पर चार पौधे लगाए जाते हैं. इन पौधों से पौधों की दूरी 6 से 7 फीट होती है. ट्राली सिस्टम से ड्रैगन फ्रूट की खेती करने से उत्पादन अधिक होता है. रिंग विधि से एक बीघा में ड्रैगन फूड की खेती ट्रॉली सिस्टम से आधे बीघे में हो जाएगी. ट्रॉली सिस्टम में पौधे अधिक लगते हैं और जगह भी कम लगती है.
Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें
Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu… और पढ़ें