तराई के बढ़ते पारे के बीच भी वनराज रहेंगे कूल, PTR में हुई ये तैयारियां

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तराई के बढ़ते पारे के बीच भी वनराज रहेंगे कूल, PTR में हुई ये तैयारियां


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पीलीभीत टाइगर रिजर्व प्रशासन की योजना के मुताबिक, टाइगर रिजर्व के अलग-अलग रेंजों में 5 नए सोलर पंप आधारित वाटर होल तैयार किए जा रहे हैं. इन नए वाटर होल के निर्माण पर प्रति यूनिट लगभग 1 लाख रुपये की लागत आने का अनुमान है. अभी तक मिली जानकारी के अनुसार, पीलीभीत टाइगर रिजर्व के पांचों रेंजों में 55 से ज्यादा वाटर होल पहले से मौजूद हैं, जिनमें से 26 वाटर होल सोलर पंप की मदद से भरे जाते थे.

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पीलीभीतः पीलीभीत टाइगर रिजर्व में भीषण गर्मी के दस्तक देने से पहले ही प्रशासन ने जंगली जानवरों को राहत पहुंचाने की तैयारी तेज कर दी है. जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, जंगल के प्राकृतिक जलस्रोत सूखने का खतरा मंडराने लगा है, जिसे देखते हुए वन विभाग ने वन्यजीवों के लिए पानी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का जिम्मा उठाया है. इस बार का खास फोकस आधुनिक तकनीक और सोलर ऊर्जा पर है, ताकि दूर-दराज के इलाकों में भी पानी की सप्लाई बिना किसी रुकावट के चलती रहे.

5 नए सोलर पंप आधारित वाटर होल हो रहे तैयार

पीलीभीत टाइगर रिजर्व प्रशासन की योजना के मुताबिक, टाइगर रिजर्व के अलग-अलग रेंजों में 5 नए सोलर पंप आधारित वाटर होल तैयार किए जा रहे हैं. इन नए वाटर होल के निर्माण पर प्रति यूनिट लगभग 1 लाख रुपये की लागत आने का अनुमान है. अभी तक मिली जानकारी के अनुसार, पीलीभीत टाइगर रिजर्व के पांचों रेंजों में 55 से ज्यादा वाटर होल पहले से मौजूद हैं, जिनमें से 26 वाटर होल सोलर पंप की मदद से भरे जाते थे. अब इन 5 नए वाटर होल के बन जाने के बाद पूरे रिजर्व क्षेत्र में पानी के ठिकानों की कुल संख्या बढ़कर 60 हो जाएगी. इससे बाघ, हिरण और अन्य वन्यजीवों को तपती गर्मी में पानी की तलाश में भटकना नहीं पड़ेगा और वे अपने सुरक्षित ठिकानों के पास ही प्यास बुझा सकेंगे.

जंगल से गुजरती हैं शारदा, देवहा नदी

दरअसल पीलीभीत टाइगर रिजर्व का इलाका काफी बड़ा है, जो करीब 73 हजार हेक्टेयर से भी अधिक क्षेत्रफल में फैला हुआ है. हालांकि इस जंगल में शारदा और देवहा जैसी नदियाँ, नाले और कई वेटलैंड मौजूद हैं, लेकिन गर्मी के चरम पर पहुँचते ही कई छोटे प्राकृतिक स्रोत सूख जाते हैं. ऐसी स्थिति में टैंकरों के जरिए पानी भरना काफी चुनौतीपूर्ण और महंगा होता है. इसीलिए सोलर पंप एक स्थाई समाधान बनकर उभरे हैं. पिछले साल भी एमसीएम फाउंडेशन के सहयोग से यहाँ तीन सोलर पंप लगाए गए थे, जिससे सोलर तकनीक से रिचार्ज होने वाले जलाशयों की संख्या बढ़कर 29 हो गई थी.

लोकल 18 में बातचीत में डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह ने बताया कि समय से पहले बढ़ती गर्मी को देखते हुए वन्यजीवों के लिए पानी का प्रबंध करना विभाग की प्राथमिकता है. उन्होंने बताया कि नए वाटर होल बनाने के लिए उपयुक्त जगहों की पहचान कर ली गई है और निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है. विभाग की कोशिश है कि जल्द से जल्द ये नए वाटर होल चालू हो जाएं ताकि गर्मी का पारा चढ़ने से पहले ही जानवरों को पीने का साफ पानी उपलब्ध हो सके.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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