धीमी आंच, खड़े मसाले और प्यार से बना मटन…, 50 सालों से जौनपुर की शान ‘कल्लू का मटन’, बनारस-लखनऊ से भी खींचे चले आते है लोग
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Top Non-Veg Places In Jaunpur: जौनपुर की गलियों में खुशबू से महकता एक ऐसा स्वाद जो दशकों से लोगों के दिलों को जीत रहा है- कल्लू का मटन. 1970 के दशक से शुरू हुई इस परंपरा में लकड़ी के चूल्हे पर तवे पर भुने मसालों से बना मटन स्वाद की नई परिभाषा पेश करता है. जानिए कैसे प्रेम प्रकाश गुप्ता ने इस व्यंजन को त्योहारों की खास डिश से आम दिनों की पहली पसंद बनाया और अब तीसरी पीढ़ी भी इस विरासत को संभाले हुए है.
Top Non-Veg Places In Jaunpur: जब बात जौनपुर के खाने की होती है तो कई व्यंजन दिल को लुभाते हैं, लेकिन ‘कल्लू का मटन’ का नाम सुनते ही स्वाद के शौकीनों के मुंह में पानी आ जाता है. यह सिर्फ एक डिश नहीं, बल्कि जौनपुर की पहचान बन चुका है. पिछले करीब 50 वर्षों से यह मटन अपने अनोखे स्वाद और परंपरागत तरीके से बनाए जाने की वजह से हर उम्र के लोगों की पसंद बना हुआ है.
सौरभ गुप्ता का कहना था कि असली स्वाद ‘धैर्य और दिल’ से आता है. यही वजह है कि उनका मटन आज भी गैस पर नहीं, बल्कि लकड़ी के चूल्हे पर पकाया जाता है. खड़े मसालों में इलायची, दालचीनी, लौंग, काली मिर्च, तेजपत्ता और जायफल जैसी चीजें शामिल होती हैं, जो मटन में ऐसी खुशबू भर देती हैं कि दूर से ही लोगों के कदम उस ओर खिंच जाते हैं.
आज तीसरी पीढ़ी इस व्यवसाय को चला रही है. उनके बेटे और पोते इस स्वाद की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. हर दिन सैकड़ों लोग यहां मटन खाने आते हैं- कुछ पुराने ग्राहक जो दशकों से इस स्वाद के दीवाने हैं, तो कुछ नए जो सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा सुनकर पहुंचते हैं. खास बात यह है कि कल्लू का मटन बिना किसी फैंसी सजावट या आधुनिक तड़के के, सिर्फ देसी अंदाज में परोसा जाता है- प्याज, नींबू और तंदूरी रोटी के साथ.
दादा कहते थे कि मटन वही अच्छा है जो मसाले और मेहनत से पके, शॉर्टकट से नहीं. कुल मिलाकर, कल्लू का मटन सिर्फ एक डिश नहीं बल्कि जौनपुर की सांस्कृतिक थाली का अभिन्न हिस्सा बन चुका है. यह साबित करता है कि जब स्वाद में परंपरा और मेहनत का मेल होता है, तो वह व्यंजन सिर्फ खाना नहीं, बल्कि विरासत बन जाता है.
राहुल गोयल सीनियर पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया 16 साल से ज्यादा का अनुभव है. साल 2011 में पत्रकारिता का सफर शुरू किया. नवभारत टाइम्स, वॉयस ऑफ लखनऊ, दैनिक भास्कर, पत्रिका जैसे संस्थानों में काम करने का अनुभव. सा…और पढ़ें
राहुल गोयल सीनियर पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया 16 साल से ज्यादा का अनुभव है. साल 2011 में पत्रकारिता का सफर शुरू किया. नवभारत टाइम्स, वॉयस ऑफ लखनऊ, दैनिक भास्कर, पत्रिका जैसे संस्थानों में काम करने का अनुभव. सा… और पढ़ें