पीलीभीत: एक साल से लटकी पुलिया, धूल फांकते राहगीर और हादसों को दावत देती सड़क
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उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में विकास के दावों की सच्चाई माधोटांडा मार्ग की खस्ताहाल स्थिति बयां कर रही है. पीलीभीत-माधोटांडा मार्ग पर स्थित पुलियाओं का निर्माण पिछले एक साल से भी ज्यादा समय से लटका हुआ है. बारिश और बाढ़ के दौरान जो पुलिया टूट गई थीं, वे आज भी वैसे ही पड़ी हैं, जिससे आम लोगों का आवागमन बेहद मुश्किल हो गया है.
Pilibhit News: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में ‘स्मार्ट’ होते शहरों और विकास के बड़े-बड़े दावों की हकीकत देखनी हो, तो माधोटांडा मार्ग का रुख कीजिए. यहां की उखड़ी सड़कें और आधी-अधूरी पुलिया चिल्ला-चिल्लाकर सिस्टम की लापरवाही की कहानी बयां कर रही हैं. दो साल पहले आई बाढ़ ने जो जख्म पीलीभीत-माधोटांडा मुख्य मार्ग को दिए थे, प्रशासन की मरहम-पट्टी (मरम्मत) आज तक पूरी नहीं हो पाई है. आलम यह है कि यह मुख्य मार्ग अब सफर के लिए नहीं, बल्कि हादसों के लिए जाना जाने लगा है.
बाईपास के पास ‘खूनी’ मोड़, दो साल से जारी है इंतजार
नए बाईपास से चंद कदमों की दूरी पर स्थित पुलिया के हालात सबसे ज्यादा भयावह हैं. स्थानीय निवासी बताते हैं कि दो साल पहले आई बाढ़ ने इस पुलिया को जमींदोज कर दिया था. उस वक्त प्रशासनिक अधिकारियों ने इसे जल्द ठीक कराने के बड़े-बड़े वादे किए थे कि जल्द ही यातायात सुचारू कर दिया जाएगा. लेकिन आज एक साल से भी ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य कछुआ गति से चल रहा है. सड़क पर उखड़ी हुई गिट्टियां और आधे-अधूरे ढांचे ने इस मार्ग को हादसों का अड्डा बना दिया है.
पलट रहे हैं वाहन, बाल-बाल बच रही हैं जानें
इस मार्ग पर सफर करना अब किसी जोखिम से कम नहीं है. सड़क पर बने गहरे गड्ढों और निर्माणाधीन पुलिया के कारण आए दिन ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और भारी वाहन अनियंत्रित होकर पलट रहे हैं. गनीमत है कि अब तक कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई, लेकिन राहगीर हर पल जान जोखिम में डालकर यहां से गुजरते हैं. सबसे ज्यादा प्रभावित स्कूली बच्चे और रोजाना काम पर जाने वाले लोग हैं. रात के समय यह मार्ग ‘डेथ ट्रैप’ में तब्दील हो जाता है, जहां रोशनी के अभाव में गड्ढे नजर नहीं आते और वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं.
धूल के गुबार और बीमारियों का हमला
खस्ताहाल सड़क सिर्फ हादसों को ही नहीं, बल्कि बीमारियों को भी न्योता दे रही है. सड़क से उड़ने वाली धूल के गुबार ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. राहगीरों और आसपास के ग्रामीणों को सांस लेने में दिक्कत और फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि वे न केवल हादसों के डर में जी रहे हैं, बल्कि इस धूल भरी हवा के कारण उनके स्वास्थ्य पर भी गंभीर संकट मंडरा रहा है.
आने वाली बरसात बढ़ा सकती है मुश्किलें
स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों में अब प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मानसून आने से पहले इन पुलियाओं और सड़क का निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यह मार्ग पूरी तरह ठप हो जाएगा. बाढ़ के समय हालात और भी बदतर हो सकते हैं, जिससे दर्जनों गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट सकता है. अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया लोक निर्माण विभाग और जिला प्रशासन इस ओर कब ध्यान देता है.
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें