पूसा हाइब्रिड से लेकर आजाद क्रांति तक, गर्मियों के लिए बैंगन की ये वैरायटी वरदान

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पूसा हाइब्रिड से लेकर आजाद क्रांति तक, गर्मियों के लिए बैंगन की ये वैरायटी वरदान


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पूसा हाइब्रिड से आजाद क्रांति तक, गर्मियों के लिए बैंगन की ये वैरायटी वरदान

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Brinjal Top Varieties : बैंगन की खेती के लिए खरीफ और रबी दोनों सीजन अनुकूल हैं. शुष्क और गर्म जलवायु, दोनों इसके लिए अच्छी हैं. लोकल 18 से रायबरेली कृषि एक्सपर्ट अनूप शंकर मिश्र बताते हैं कि गर्मियों के मौसम में बैंगन की खेती करने वाले किसानों को यह ध्यान रखना चाहिए कि खेत की मिट्टी का पीएच मान 6 से 7 तक ही हो. लंबे फल वाली प्रजाति के लिए दो पौधों के बीच की दूरी 70 से 75 सेंटीमीटर रखें. एक हेक्टेयर के लिए 250 से 300 ग्राम बीज की जरूरत पड़ती है.

गर्मी की शुरुआत हो गई है. ऐसे में किसान उन्हीं फसलों की खेती करते हैं, जिनकी मौसम के अनुसार बाजार में मांग ज्यादा रहती है. इन्हीं मौसमी सब्जियों में से एक बैगन भी है. बैंगन की खेती के लिए खरीफ और रबी दोनों सीजन अनुकूल माने जाते हैं, क्योंकि शुष्क व गर्म जलवायु, दोनों इसके लिए अच्छी हैं. इसकी खेती से कम लागत में किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.

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कृषि के क्षेत्र में 15 वर्ष का अनुभव रखने वाले रायबरेली के खुशहाली कृषि संस्थान के पूर्व प्रबंधक अनूप शंकर मिश्र बताते हैं कि बैंगन एक मिश्रित फसल है, जो खरीफ और रबी दोनों ही सीजन में तैयार हो जाती है. गर्मियों के मौसम में बैंगन की खेती करने वाले किसानों को यह ध्यान रखना चाहिए कि खेत की मिट्टी का पीएच मान 6 से 7 तक ही हो.

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इसके साथ ही, बैंगन की नर्सरी में बीज बुवाई के समय पर्याप्त मात्रा में ऑर्गेनिक खाद का उपयोग किया जाए. खेत में जल निकासी की सुविधा के साथ ही बलुई दोमट मिट्टी इस खेती के लिए बेहद उपयोगी है.

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अनूप शंकर मिश्र बताते हैं कि खेत में बैंगन की क्यारी में लंबे फल वाली प्रजाति के लिए दो पौधों के बीच की दूरी 70 से 75 सेंटीमीटर और गोल फल वाली प्रजाति के लिए दो पौधों के बीच की दूरी 90 सेंटीमीटर तक होनी चाहिए.

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ग्रीष्मकालीन बैंगन की प्रजातियों में पूसा हाइब्रिड 9, विजय हाइब्रिड, पूसा क्लस्टर, पूसा क्रांति, पूसा हाइब्रिड 5, आजाद क्रांति, पंत ऋतुराज और पंत सम्राट टी 3 शामिल हैं. एक हेक्टेयर की फसल के लिए 250 से 300 ग्राम बीज की जरूरत पड़ती है.

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अनूप मिश्र बताते हैं कि किसान पौधे की रोपाई से पहले प्रति हेक्टेयर की दर से 60 किलोग्राम फॉस्फोरस व पोटाश, 75 किलोग्राम नाइट्रोजन खेत में डालें. इसके बाद जब पौधे पर फूल आने लगें, तब दोबारा 75 किलोग्राम नाइट्रोजन डाल दें. इससे पौधे को भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मिल जाएंगे और पौधा स्वस्थ रहने से पैदावार में भी वृद्धि होगी.

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गर्मियों के मौसम में बैंगन की फसल में तनाछेदक कीट की सुंडी पौधों में लग जाती है, जो मुख्य तने तक पहुंचकर पौधे को सुखा देती है. इससे बचाव के लिए किसान रैटून फसल न लें, क्योंकि इसमें कीट लगने का खतरा अधिक रहता है. किसान इससे बचाव के लिए पांच फेरोमोन ट्रैप लगाएं. फूल आने से पहले पौधों पर 1 मिलीलीटर डेल्टामेंथ्रिन का छिड़काव कर दें, इससे पौधे में रोग नहीं लगेगा.



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