फसल की बुवाई से पहले किसान ध्यान दें! बीज को कीट से बचाने के लिए करें यह उपाय

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फसल की बुवाई से पहले किसान ध्यान दें! बीज को कीट से बचाने के लिए करें यह उपाय


कानपुर: देशभर में किसान मेहनत से फसल तैयार करते हैं, लेकिन कई बार रोग और कीट फसल को खराब कर देते हैं. इससे किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है. ऐसे में किसानों के लिए सबसे जरूरी है कि वे बुवाई से पहले बीज का सही तरीके से उपचार करें. जिस प्रकार से छोटे बच्चों को टीकाकरण किया जाता है, ताकि उन्हें भविष्य में बीमारियों से बचाया जा सके, इस तरीके से फसलों को भविष्य में बीमारियों से बचाने के लिए बीजों का भी शोध करना या फिर टीकाकरण करना बेहद जरूरी है.

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CSA) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. महक सिंह का कहना है कि अगर किसान शोधित या उपचारित बीज का इस्तेमाल करें, तो फसल में बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है और उत्पादन भी बेहतर मिलता है.

बुवाई से पहले बीज उपचार बेहद जरूरी
डॉ. महक सिंह बताते हैं कि फसल की अच्छी शुरुआत स्वस्थ बीज से ही होती है. अगर बीज पहले से ही फंगस, बैक्टीरिया या कीटों से संक्रमित हो, तो पौधा शुरुआत में ही कमजोर हो जाता है. इसलिए बुवाई से पहले बीज को दवाओं या जैविक उपचार से तैयार करना बहुत जरूरी होता है. बीज उपचार करने से फसल को स्मट, रस्ट, झुलसा और दीमक जैसी कई बीमारियों से बचाया जा सकता है. साथ ही बीज का अंकुरण बेहतर होता है और पौधे की शुरुआती वृद्धि भी मजबूत रहती है. इससे खेत में पौधे बराबर निकलते हैं और फसल का उत्पादन बढ़ता है.

इन दवाओं से कर सकते हैं बीज का उपचार
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, किसान बीज उपचार के लिए कुछ सामान्य फफूंदनाशक और कीटनाशक दवाओं का उपयोग कर सकते हैं. जैसे कार्बेन्डाजिम, मैंकोजेब और मेटालैक्सिल जैसे फफूंदनाशक बीज को फंगल रोगों से बचाते हैं. वहीं इमिडाक्लोप्रिड या थायोमेथोक्सम जैसी दवाएं शुरुआती कीटों से सुरक्षा देती हैं.

इसके अलावा किसान जैविक तरीके से भी बीज उपचार कर सकते हैं. ट्राइकोडर्मा या प्सूडोमोनास जैसे जैविक तत्वों से बीज का उपचार करने से मिट्टी में मौजूद कई प्रकार के रोगजनक फंगस का असर कम हो जाता है. इससे पौधे की जड़ें मजबूत बनती हैं और पौधा तेजी से बढ़ता है.

बीज उपचार करने का आसान तरीका
किसान सबसे पहले साफ और स्वस्थ बीज चुनें. इसके बाद तय मात्रा में दवा लेकर बीज पर हल्का पानी छिड़क दें और दवा को बीज के साथ अच्छी तरह मिला दें, ताकि हर बीज पर दवा की परत लग जाए. इसके बाद बीज को कुछ समय के लिए छाया में सुखा लें और फिर बुवाई करें. आम तौर पर एक किलो बीज के लिए करीब 2 से 3 ग्राम फफूंदनाशक दवा पर्याप्त मानी जाती है. वहीं जैविक दवाओं का इस्तेमाल भी निर्धारित मात्रा के अनुसार करना चाहिए.

इससे बढ़ेगा उत्पादन और घटेगा खर्च
डॉ. महक सिंह का कहना है कि अगर किसान बुवाई से पहले बीज उपचार करते हैं, तो फसल शुरुआती बीमारियों से सुरक्षित रहती है. इससे पौधे मजबूत बनते हैं और बाद में खेत में दवाओं के छिड़काव की जरूरत भी कम पड़ती है. कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यह एक छोटा सा कदम है, लेकिन इसका असर पूरी फसल पर दिखाई देता है. इसलिए किसानों को चाहिए कि वे हर सीजन में बुवाई से पहले बीज को जरूर शोधित करें, ताकि उत्पादन बेहतर हो और उन्हें अच्छी आमदनी मिल सके.



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