फुलवा का खास स्वाद, विलुप्ति के खतरे के बीच विरासत बचाने की कोशिश

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फुलवा का खास स्वाद, विलुप्ति के खतरे के बीच विरासत बचाने की कोशिश


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Farrukhabad latest news : फर्रुखाबाद का फुलवा आलू एक बार फिर चर्चा में है. देश की सबसे पुरानी मानी जाने वाली इस प्रजाति को जीआई टैग दिलाने के प्रयास शुरू हो गए हैं. 1700 ईस्वी से चली आ रही यह किस्म स्वाद, इतिहास और कृषि विरासत का अनोखा संगम है. मान्यता मिलने पर इसे नई पहचान मिल सकती है.

फर्रुखाबाद : देश की सबसे पुरानी मानी जाने वाली आलू की प्रजाति फुलवा आलू को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है. जानकारों के अनुसार लगभग 1700 ईस्वी के आसपास जब Portugal के व्यापारी भारत आए, तब वे आलू की यह विशेष किस्म भी साथ लाए थे. तभी से यह प्रजाति भारतीय खेतों में बोई जाती रही है. कहा जाता है कि उस समय यह आलू राजा-महाराजाओं के शाही भोजन का अहम हिस्सा हुआ करता था.

मदर ऑफ फुलवा की पहचान
फुलवा आलू को “मदर ऑफ फुलवा” या “मदर आलू” भी कहा जाता है. मान्यता है कि भारत में विकसित हुई आलू की कई अन्य किस्में इसी मूल प्रजाति से तैयार की गईं. इसी कारण इसे आलू की जननी के रूप में विशेष सम्मान दिया जाता है. यह न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि कृषि विरासत का भी प्रतीक माना जाता है.

स्वाद और लोकप्रियता का अनोखा संगम
Local18 की टीम को बारिश राजपूत ने बताया कि जब भारत में फुलवा आलू का उत्पादन शुरू हुआ, तो इसके आधार पर ही अन्य किस्मों को विकसित किया गया. स्वाद के मामले में यह आलू बेहद खास माना जाता है. इससे बने व्यंजन लोगों को अत्यंत पसंद आते हैं. यही वजह है कि आज भी बाजार में इसकी मांग बनी रहती है और लोग विशेष रूप से इसकी खरीदारी करते हैं.

विलुप्ति के खतरे के बीच संरक्षण की पहल
बदलते समय के साथ आलू की कई पुरानी प्रजातियां देश के विभिन्न हिस्सों में विलुप्त होने लगी हैं. ऐसे में फर्रुखाबाद इस ऐतिहासिक किस्म को बचाने के लिए लगातार प्रयासरत है. यहां न केवल फुलवा आलू के उत्पादन को बढ़ाया जा रहा है, बल्कि इसे अन्य राज्यों तक भी पहुंचाया जा रहा है, ताकि इसकी पहचान और मजबूत हो सके.

जीआई टैग से मिलेगी नई पहचान
फुलवा आलू को विशिष्ट पहचान दिलाने के उद्देश्य से फर्रुखाबाद के उद्यान विभाग ने जीआई टैग के लिए आवेदन किया है. यदि यह मान्यता मिलती है, तो फुलवा आलू को कानूनी संरक्षण मिलेगा और इसे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार में अलग पहचान प्राप्त होगी. इससे किसानों की आय में वृद्धि होने की भी उम्मीद जताई जा रही है.

विरासत से भविष्य की ओर कदम
फुलवा आलू केवल एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि फर्रुखाबाद की ऐतिहासिक धरोहर है. सदियों पुरानी इस प्रजाति को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है. जीआई टैग मिलने की स्थिति में यह विरासत न केवल जिले, बल्कि पूरे देश का गौरव बन सकती है.



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