बरेली के वो 5 किसान, जिन्होंने जैविक खेती अपनाकर बदली खुद की किस्मत

0
बरेली के वो 5 किसान, जिन्होंने जैविक खेती अपनाकर बदली खुद की किस्मत


Last Updated:

Bareilly News: बरेली शहर के ऐसे पांच किसान हैं, जिन्होंने पारंपरिक किसानी को छोड़ जैविक खेती अपनाई है और आज वह करोड़ों रुपए का टर्नओवर कर रहे हैं. आइए बरेली के इन्हीं किसानों के बारे में जानते हैं, जिन्होंने जैविक खेती कर अपनी जिंदगी बदल दी.

बरेली शहर के संजीव गंगवार 29 वर्षीय युवा हैं. अपनी पारंपरिक खेती को छोड़ उन्होंने जैविक खेती को अपनाया. वह अब अपने जीवन का भविष्य सुधारने के लिए काम कर रहे हैं. बरेली जिले में किसानों के लिए वह एक मॉडल के रूप में उभर रहे हैं. उनके पास विदेशी जीवक खेती से उगाई हुई सब्जियां और बिना बीज का खीरा है. यह बरेली के लोगों के लिए उपलब्ध करा रहे हैं. उनकी सभी सब्जी में किसी भी प्रकार का कोई केमिकल उपयोग नहीं किया गया है. मिट्टी, पानी के उपयोग से वह सभी सब्जियां उगाते हैं. उनके पास लाल शिमला मिर्च, पीली शिमला मिर्च और हरी शिमला मिर्च के साथ-साथ लाल टमाटर, पीला टमाटर और हरा टमाटर भी उपलब्ध है. करोड़ों के टर्नओवर के साथ सालाना मोटा प्रॉफिट कमाते हैं.

Yash pal ji

बरेली शहर में जैविक खेती को लगातार किसान अपना रहे हैं और करोड़ों का टर्नओवर सालाना कर रहे हैं. बरेली जिले में 300 रुपए किलो का ड्रैगन फ्रूट जैविक खेती की मदद से उगाया जा रहा है और उनके दो पॉलीहाउस फार्मिंग प्लांट संचालित किए जाते हैं, जिससे यह अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहे हैं. बरेली के यशपाल ने कई सालों से पारंपरिक खेती से हटकर जैविक खेती की ओर अग्रसर किया और सालाना मोटा मुनाफा कमा रहे हैं. बरेली शहर के यशपाल के पॉलीहाउस फार्म पर किसानों के लिए फ्री प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाता है.

अनिल कुमार साहनी

बरेली में वाइन वाले अंगूरों की जैविक खेती अनिल कुमार साहनी कर रहे हैं. उन्होंने अपने फार्महाउस पर इटली, फ्रांस और कैलिफोर्निया जैसी जगहों से उन्नत किस्म के अंगूरों के पौधे मंगाकर उत्तर भारत का सबसे बड़ा अंगूर उत्पादक केंद्र स्थापित किया है. गॉडसन ऑर्गेनिक फार्म बरेली जिले के भंडसर और तेगरा गोटिया गांव के पास स्थित है. यहां 100% जैविक तरीके से खेती की जाती है और सूक्ष्म जलवायु को नियंत्रित करने के लिए अपना वेदर स्टेशन भी स्थापित किया है. यहां विदेशी वाइन ग्रेप्स की लगभग 17 से 35 अंतरराष्ट्रीय स्तर की किस्में उगाई जा रही हैं. वर्तमान में यह खेती लगभग 10 से 40 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है. उत्तर प्रदेश सरकार ने इस फार्म को राज्य की पहली ऑर्गेनिक वाइनरी स्थापित करने का लाइसेंस भी प्रदान किया है. यहां भविष्य में पर्यटकों के लिए होमस्टे और वाइन टेस्टिंग जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है.

Add News18 as
Preferred Source on Google

राजेंद्र गंगवार अपनी आधुनिक और टिकाऊ जैविक कृषि पद्धतियों

बरेली के जैविक किसान राजेंद्र गंगवार अपनी आधुनिक और टिकाऊ जैविक कृषि पद्धतियों के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने रासायनिक खेती को छोड़कर पूरी तरह से जैविक तरीके अपनाया है, जिससे न केवल मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, बल्कि वे अन्य किसानों के लिए एक मिसाल भी बने हैं. प्राकृतिक खाद का उपयोग कर वह अपनी खेती में गोबर की खाद, वर्मीकम्पोस्ट केंचुआ खाद और हरी खाद का प्रमुखता से उपयोग करते हैं. रासायनिक कीटनाशकों के स्थान पर वे नीम के तेल, दशपर्णी अर्क और वेस्ट डीकंपोजर का इस्तेमाल करते हैं, ताकि फसल को नुकसान पहुंचाए बिना कीटों का नियंत्रण किया जा सके. मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए वे एक ही खेत में बदल-बदल कर फसलें उगाते हैं. किसानों के लिए एक अच्छा मॉडल तैयार किए बिना बीज का खीरा उगाकर टर्नओवर के साथ लाखों की करते हैं.  राजेंद्र अपने मित्र मुकेश गुप्ता के साथ मिलकर यह पूरा पॉलीहाउस फार्मिंग चलाते हैं.

रामवीर सिंह

रामवीर सिंह है पेशे से एक पूर्व पत्रकार रहे हैं. हाइड्रोपोनिक्स रामवीर सिंह अपने तीन मंजिला घर में बिना मिट्टी के खेती करते हैं, जिसे ‘हाइड्रोपोनिक्स’ तकनीक कहा जाता है. इस तकनीक में मिट्टी की जगह केवल पानी और पोषक तत्वों का उपयोग किया जाता है. उन्होंने अपने घर की बालकनी और छतों पर पीवीसी PVC पाइपों का जाल बिछाकर 10,000 से अधिक पौधे उगाए हैं. वे स्ट्रॉबेरी, गोभी, भिंडी, लौकी, टमाटर, पालक, मिर्च, मेथी और बैंगन जैसी कई मौसमी सब्जियां और फल उगाते हैं. करोड़ों रुपए के टर्नओवर के साथ सालाना मोटी कमाई करते हैं और किसानों को फ्री प्रशिक्षण देते हैं.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *