बाबर से औरंगज़ेब तक… फिर भी क्यों ‘महान’ कहलाए अकबर? जानिए वजह

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बाबर से औरंगज़ेब तक… फिर भी क्यों ‘महान’ कहलाए अकबर? जानिए वजह


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आगरा. उत्तर प्रदेश का आगरा मुग़ल इतिहास का अहम गवाह रहा है. यहीं से कई बादशाहों ने हिंदुस्तान पर हुकूमत की, लेकिन जब मुग़ल शासकों की बात होती है तो एक नाम सबसे अलग और सबसे प्रभावशाली नजर आता है सम्राट अकबर. इतिहासकारों के मुताबिक अकबर न सिर्फ एक शक्तिशाली योद्धा थे, बल्कि दूरदर्शी, धर्मनिरपेक्ष और कुशल प्रशासक भी थे. यही वजह है कि उन्हें मुग़ल सल्तनत का सबसे बेहतर और महान बादशाह माना जाता है.

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आगरा. उत्तर प्रदेश के आगरा में कई साल तक मुग़ल बादशाहों ने शासन किया. आगरा किला से ही मुग़ल सल्तनत की बागडोर संभाली जाती थी. इतिहासकारों के अनुसार मुग़ल साम्राज्य की शुरुआत 1526 में बाबर की ओर से लड़ी गई पहली पानीपत की लड़ाई से हुई और 1857 में बहादुर शाह ज़फ़र के साथ इसका अंत हुआ.

मध्य एशिया के चंगेज-तैमूर वंश से जुड़े मुग़लों ने भारत में एक विशाल, सांस्कृतिक और प्रशासनिक रूप से समृद्ध साम्राज्य की स्थापना की. शाहजहां जैसे शासकों ने स्थापत्य और कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, जबकि औरंगज़ेब के बाद साम्राज्य धीरे-धीरे पतन की ओर बढ़ गया.

मुग़ल बादशाहों में सबसे बेहतर क्यों माने जाते हैं अकबर?
आगरा के वरिष्ठ इतिहासकार अनुराग पालीवाल के अनुसार, मुग़ल बादशाहों में अकबर को सबसे महान माना जाता है. उनका शासनकाल 1556 से 1605 तक रहा और इसे मुग़ल काल का स्वर्ण युग कहा जाता है. अकबर ने धर्मनिरपेक्ष सोच, कुशल प्रशासनिक सुधारों और साम्राज्य विस्तार के माध्यम से एक सशक्त शासन स्थापित किया. उन्होंने धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा दिया, हिंदुओं को उच्च पदों पर नियुक्त किया और जज़िया कर समाप्त किया. 1582 में अकबर ने ‘दीन-ए-इलाही’ की शुरुआत की, जो शांति और सहिष्णुता पर आधारित एक नया वैचारिक प्रयास था. इन्हीं कारणों से वे अपनी प्रजा में अत्यंत लोकप्रिय थे.

13 वर्ष की उम्र में बने सम्राट
इतिहासकार बताते हैं कि अकबर की ताजपोशी मात्र 13 वर्ष की आयु में 14 फरवरी 1556 को पंजाब के कलानौर में हुई थी. प्रारंभिक वर्षों में बैरम खान ने उनके संरक्षक के रूप में शासन संभाला. उसी वर्ष 1556 में हुए पानीपत के दूसरे युद्ध में अकबर ने हेमू को पराजित कर दिल्ली और आगरा पर अपना नियंत्रण मजबूत किया. इसके बाद उन्होंने चित्तौड़, रणथंभौर, गुजरात, बंगाल, कश्मीर और कंधार को भी मुग़ल साम्राज्य में शामिल किया.

प्रशासन, संस्कृति और ‘नवरत्न’
अकबर ने केवल साम्राज्य का विस्तार ही नहीं किया, बल्कि आर्थिक स्थिरता और प्रशासनिक सुधारों पर भी जोर दिया. वे निरक्षर होने के बावजूद ज्ञान और विद्वानों के संरक्षक थे. उनके दरबार में ‘नवरत्न’ मौजूद थे, जिनमें बीरबल, तानसेन और अबुल फ़ज़ल जैसे विद्वान शामिल थे। अकबर के शासनकाल में फ़ारसी और भारतीय कला का अद्भुत संगम देखने को मिला. धार्मिक सहिष्णुता, न्यायप्रियता और सांस्कृतिक समन्वय की नीति ने अकबर को मुग़ल इतिहास का सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली शासक बना दिया.

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Madhuri Chaudhary

पिछले 4 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हूं और फिलहाल News18 में कार्यरत हूं. इससे पहले एक MNC में भी काम कर चुकी हूं. यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की बीट कवर करती हूं. खबरों के साथ-साथ मुझे…और पढ़ें



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