भाई-भाई में झगड़ा, असाध्य बीमारी…ये सब पितृदोष के लक्षण, पंडित से जानिए बचाव का तरीका

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भाई-भाई में झगड़ा, असाध्य बीमारी…ये सब पितृदोष के लक्षण, पंडित से जानिए बचाव का तरीका


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Pitra Dosh Relief : क्या आप भी पितृदोष से परेशान रहते हैं. हो सकता है ऐसा हो, लेकिन आपको पता नहीं. अगर आपके घर में भी कलह मची हुई है. परिवार में कोई परेशान या अन्य समस्याएं हैं तो यह पितृ दोष के लक्षण हैं. विंध्यधाम के विद्वान आचार्य पं. अनुपम महाराज लोकल 18 से बताते हैं कि पितृदोष की वजह से कई समस्याएं होती हैं. घर में अशांति रहती है. आपस में कलह, भाई-भाई में मतभेद, बातों में चिल्लाहट, घर की दीवारें फटने लगे, घर पर पीपल और बरगद पौधे का उगना आदि ये सब पितृदोष के लक्षण हैं.

मिर्जापुर. अक्सर लोग पितृदोष से परेशान रहते हैं. हालांकि, इस बारे में पता न होने की वजह से लोग समाधान नहीं कर पाते हैं. अगर आपके घर में भी कलह मची हुई है. परिवार में कोई परेशान या अन्य समस्याएं हैं तो यह पितृ दोष के लक्षण हैं. पितृदोष के बारे में विंध्यधाम के विद्वान आचार्य पं. अनुपम महाराज लोकल 18 से बताते हैं कि इसके निवारण के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध करवा सकते हैं. पितृदोष की वजह से कई समस्याएं होती हैं. घर में अशांति रहती है. शारीरिक और मानसिक तनाव रहता है. अनेक बाधाएं आने लगती हैं. आपस में कलह, भाई-भाई में मतभेद. बातों में चिल्लाहट, घर की दीवारें फटने लगे, घर पर पीपल और बरगद पौधे का उगना ये सब पितृदोष के लक्षण हैं. खाने के वक्त लड़ाई, असाध्य बीमारी, बार-बार दवा करने और पूजा पाठ करने से भी आराम नहीं मिले, किसी की परछाई महसूस हो. कोई आवाज महसूस होना या बनते हुए काम बिगड़ जाए तो यह भी पितृदोष है.

क्या है मुक्ति का रास्ता

पं. अनुपम महाराज कहते हैं कि पितृदोष से बचने के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध कराना चाहिए. रामगया घाट, पिचासमोचन घाट वाराणसी या बौद्ध गया पर जाकर पितरों की मुक्ति के लिए नारायण बलि देना चाहिए. ये पितृ अभी पितृ योनि में हैं. सात्विक, राजसिक व तामसिक तीन प्रकार के पितरों की मुक्ति के लिए जौ के आटे का पिंड, चावल का पिंड और तिल का पिंड दिया जाता है. पितरों की मुक्ति के श्राद्धकर्म आवश्यक है. पितरों की प्रसन्नता के लिए श्राद्धकर्म जरूर कराना चाहिए. आपके पास पैसे का अभाव है या श्राद्धकर्म नहीं कर पा रहे हैं तो सुबह स्नान के बाद दक्षिण दिशा में बैठ जाएं. काला तिल व जल लेकर ध्यान करें. पित्रोभेय नम: का जाप करें और तीन बार दक्षिण दिशा में जल दें.

ये भी कर सकते हैं 

पं. अनुपम महाराज के मुताबिक, अपने पिता-माता, दादा-दादी और गुरु आदि का नाम लेकर तर्पण करना चाहिए. तर्पण भी तीन तरह का होता है. देव तर्पण, पितृ तर्पण और ऋषि तर्पण तीनों करना चाहिए. पूर्व दिशा में देवताओं का तर्पण, दक्षिण दिशा में पितरों का तर्पण और उत्तर दिशा में ऋषि तर्पण करें. काला तिल से पितृ तर्पण, जौ से संत तर्पण और अक्षत से देव तर्पण करें. ये भी संभव नहीं हो तो हर आमवास्या पर सीधा (अनाज) निकालें. किसी ब्राह्मण या गरीब को दान दें, इससे पितृ दोष का प्रभाव कम होता है.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें



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