मिर्जापुर का दयालु ऑटो ड्राइवर, बुजुर्ग और छात्रों से नहीं लेता किराया, अनोखी है कहानी

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मिर्जापुर का दयालु ऑटो ड्राइवर, बुजुर्ग और छात्रों से नहीं लेता किराया, अनोखी है कहानी


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Mirzapur Free Auto Service: मिर्जापुर के ऑटो ड्राइवर रविन्द्र सिंह ने लोकल 18 से बताया कि इस कहानी के पीछे की प्रेरणा “कुछ कर सकते हैं” वाली है. उन्होंने कहा कि मन में आया कि हम गरीब जरूर है, लेकिन कुछ कर सकते है. हमने ऑटो पर विकलांग, दिव्यांग या परेशान व्यक्ति को उनके गंतव्य तक छोड़ते है और किराया नहीं लेते है. ऑटो लेने के बाद अबतक हजारों लोगों ने मुफ्त यात्रा किया है.

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मिर्जापुर के ऑटो ड्राइवर रविन्द्र सिंह

कहते है कि कुछ करने के लिए दिल बड़ा होना चाहिए. छोटा दिल रखकर कोई बड़ा नहीं होता है. ऐसा ही यूपी के मिर्जापुर जिले में बड़े दिल वाले ऑटो ड्राइवर की कहानी जानकर आप भी तारीफ करेंगे. ऑटो ड्राइवर दिव्यांग व वृद्धों के साथ ही प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थियों से पैसे नहीं लेते है. इनके ऑटो पर फ्री यात्रा को लेकर बाकायदा जानकारी दी गई है. ऑटो ड्राइवर का कहना है कि जिनके पास देने के लिए कुछ नहीं हो, उनसे लेकर क्या करेंगे. उन्होंने कहा कि अबतक हजारों यात्री फ्री में सेवा कर चुके हैं. अभी भी लोगों की मदद करते है. रात्रि में जिनके पास पैसे नहीं होते हैं, उन्हें भी यह मुफ्त में ही घर छोड़ते है.

मिर्जापुर के ऑटो ड्राइवर रविन्द्र सिंह ने लोकल 18 से बताया कि इस कहानी के पीछे की प्रेरणा “कुछ कर सकते हैं” वाली है. उन्होंने कहा कि मन में आया कि हम गरीब जरूर है, लेकिन कुछ कर सकते है. हमने ऑटो पर विकलांग, दिव्यांग या परेशान व्यक्ति को उनके गंतव्य तक छोड़ते है और किराया नहीं लेते है. ऑटो लेने के बाद अबतक हजारों लोगों ने मुफ्त यात्रा किया है. प्रभु के आशीर्वाद से कमाई भी हो रही है और मदद भी हो रहा है. हमें अच्छा लगता है कि हम किसी की मदद कर रहे है. परीक्षा के वक्त पैसा न होने पर उनको भी मुफ्त यात्रा कराते है. स्टेशन के साथ ही घुरहुपट्टी से कछवां तक ऑटो चलाते है. अभी नवरात्रि में मां के धाम में भक्तों की फ्री सेवा करके आ रहे है.

मन में रहती है दुर्भावना- राजेन्द्र
राजेन्द्र प्रजापति ने बताया कि ऑटो ड्राइवर को लेकर लोगों के मन में दुर्भवना रहती है. कई बार आप उनके बारे में गलत सोचते हैं. हालांकि, रविन्द्र का काम न सिर्फ काबिले-तारीफ है. मिर्जापुर पर कई फिल्में बनाकर यहां के नाम को खराब कर दिया गया. लोगों के मन में शहर को लेकर ही गलत विचार आ रहे है. ऐसे में  रविन्द्र की पहल सराहनीय है. हम सभी ऑटो ड्राइवर से कहेंगे कि कम से कम ऐसी पहल जरूर करें. यह जरुरी है. इससे सभी की मदद हो सकेगी और सामाजिक डर खत्म होगा.

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Manish Rai

काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें



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