मिर्जापुर में करोड़ों की लागत पर बना पीपा पुल टूटा, लोग बोले- आंधी बहाना है
मिर्जापुर: अभी तक आपने बिहार में पुल गिरने और पुल के बह जाने की खबर सुनी होगी. हालांकि, यूपी के मिर्जापुर जिले में पुल गिरने और बह जाने जैसी कहानी आम हो चुकी है. पहले विंध्याचल में पीपा पुल बह गया, उसके बाद अब नेवढ़िया घाट में भी पीपा पुल के बह जाने के बाद सरकारी सिस्टम की पोल खुल गई है. पुल बनने के 15 दिनों बाद ही पुल टूटने के बाद न सिर्फ आवागमन बाधित हुआ, बल्कि व्यवस्था की लापरवाही खुलकर सामने आ गई.
घटना के बाद से ही पुल की सुरक्षा व पुल की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं. करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद भी अगर पुल बह जाए, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है. फिलहाल पीडब्ल्यूडी विभाग आंधी को विलेन बता रहा है. ग्रामीणों ने पीपा पुल की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े किए हैं.
पीडब्ल्यूडी विभाग की जिम्मेदारी
मिर्जापुर जिले को भदोही से जोड़ने के लिए नेवढ़िया घाट से गेगराव घाट तक पीपा पुल का निर्माण कराया गया. पुल निर्माण की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी विभाग की थी. विभाग की ओर से 2 करोड़ 45 लाख रुपये का टेंडर जारी करके ठेकेदार का चयन किया गया. 14 दिनों पहले पुल का विधायक सुचिस्मिता मौर्य ने फीता काटकर उद्घाटन किया, लेकिन 14 दिन बाद ही पुल का हिस्सा टूट गया.
कहा जा रहा है कि आंधी की वजह से पुल ध्वस्त हुआ है. हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि जिस दिन पुल टूटा है, उस दिन आंधी नहीं आई थी. तेज हवा चल रहा था. हवा से ही पुल का हिस्सा बह गया. पुल गुणवत्ता के साथ नहीं बना था, इसलिए कुछ ही दिनों में टूट गया.
गुणवत्ता है खराब
शशि शेखर दुबे ने बताया कि पीपा पुल टूटने की घटना के वक्त मौके पर मौजूद था. पुल पर आ रही ट्रैक्टर के ड्राइवर ने ब्रेक मार लिया, जिससे हादसा टल गया. उस वक्त कोई था नहीं. इस बार जो पुल बना हुआ है, उसमें 4 पीपा कम लगे हैं. यहीं वजह है कि हल्की सी हवा चलने के बाद नेवढ़िया घाट की तरफ का हिस्सा टूट गया. अब भी दो पीपा लगाया जा रहा है, जो कम है.
उन्होंने कहा कि हर बार की तरह पुल का निर्माण नहीं हुआ है. बब्बे यादव ने बताया कि भदोही के लिए जाना चाह रहा था, लेकिन पुल खराब होने की वजह से नहीं जा सका. अगर 15 दिनों में ही पुल खराब हो जा रहा है, तो इसकी गुणवत्ता पर ध्यान देने की जरूरत है, वरना यह सभी के लिए खतरा बन सकता है.