मुंबई से लौट खेती में आजमाई किस्मत, आज रोजाना 2-3 हजार रुपये कमा रहा मऊ का युवक, ये खास बैंगन बना कमाई का जरिया
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Profitable Brinjal Farming: मऊ के बड़राव गांव के युवा किसान अनुपम मौर्य ने इंटर और आईटीआई की पढ़ाई के बाद खेती को अपनाकर बंपर कमाई शुरू कर दी है. वह डेढ़ बीघा में बैगन की खेती कर प्रतिदिन 2 से 3 हजार रुपए कमा रहे हैं और साथ ही चार अन्य लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. जून में रोपाई के बाद 8-9 महीने तक चलने वाली यह खेती की सही तकनीक और समय पर दवा छिड़काव से उन्हें हार्वेस्टिंग में अधिक पैदावार मिल रही है.
मऊ: उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में रहने वाले लोगों के लिए खेती ही जीवन का मुख्य आधार है. मऊ जिले के बड़राव गांव के रहने वाले अनुपम मौर्य ने इसी खेती को अपना करियर बनाया और आज वे बैंगन की फसल से बंपर मुनाफा कमा रहे हैं. अनुपम की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो रोजगार की तलाश में बड़े शहरों की ओर भागते हैं. उन्होंने न केवल अपने लिए एक मजबूत आय का जरिया बनाया, बल्कि गांव के ही चार अन्य लोगों को भी काम दिया है.
पढ़ाई के साथ-साथ संभाली खेती की कमान
अनुपम मौर्य ने इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद आईटीआई में दाखिला लिया. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने खेती को चुनने का फैसला किया. उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के वक्त वे काम की तलाश में मुंबई गए थे, लेकिन वहां स्थितियां उनके पक्ष में नहीं थीं. इसके बाद उन्होंने अपने गांव लौटने का मन बनाया और ‘BNR 704’ वैरायटी के बैंगन की खेती शुरू की. आज वे डेढ़ बीघा खेत में उन्नत तकनीक से खेती कर रहे हैं.
लागत कम और मुनाफा कई गुना ज्यादा
अनुपम के अनुसार, बैंगन की खेती के लिए जून का महीना सबसे उपयुक्त होता है. इस दौरान बेड विधि से पौधों की रोपाई की जाती है. उन्होंने बताया कि डेढ़ बीघा खेत की जुताई और रोपाई में उनकी कुल लागत मात्र 20,000 रुपये आई थी. रोपाई के ठीक 2 महीने बाद यानी अगस्त से फसल तैयार हो गई. अब स्थिति यह है कि उनके खेत से प्रतिदिन 1 से 1.5 क्विंटल बैंगन निकलता है, जो बाजार में 20 रुपये प्रति किलो के भाव से बिकता है. इस हिसाब से वे हर दिन 2,000 से 3,000 रुपये की कमाई कर रहे हैं.
9 महीने तक लगातार मिलता है फल
बैंगन की इस खेती की सबसे बड़ी खासियत इसका लंबा समय है. एक बार रोपाई होने के बाद यह फसल 8 से 9 महीने तक लगातार फल देती है. अनुपम बताते हैं कि फसल को कीड़ों से बचाना सबसे बड़ी चुनौती होती है. इसके लिए वे ‘डेलीगेट’ और ‘प्रोसेक्स’ जैसी दवाओं का समय-समय पर छिड़काव करते हैं. सही देखरेख और सही दवाइयों के इस्तेमाल से पौधों की पैदावार बढ़ती है और वे लंबे समय तक ताकतवर बने रहते हैं.
गांव के लोगों को भी मिला रोजगार
अनुपम अब केवल खुद ही नहीं कमा रहे, बल्कि लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. फसल की तुड़ाई के लिए रोजाना 3 से 4 मजदूरों की जरूरत होती है. अनुपम ने अपने गांव के ही चार लोगों को काम पर रखा है, जो सुबह से शाम तक खेत में हाथ बंटाते हैं. उनका कहना है कि अगर सही तकनीक और लगन से काम किया जाए, तो खेती घाटे का सौदा नहीं बल्कि बंपर कमाई का जरिया है.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें