मेरठ की वंशिका ने कर दिया कमाल, बिना कोचिंग के क्रैक कर दिया UPSC एग्जाम, इतने घंटे की पढ़ा
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Success Story: मेरठ की वंशिका भगत ने बिना ऑफलाइन कोचिंग के यूपीएससी परीक्षा में 809वीं रैंक हासिल कर सफलता पाई. उन्होंने बताया कि सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन कंटेंट के सहारे तैयारी की और रोज 6 से 8 घंटे पढ़ाई की, जबकि परीक्षा के करीब समय बढ़ाकर 16 से 20 घंटे तक कर दिया. उनका कहना है कि असफलता से घबराने के बजाय अपनी कमियों को सुधारना जरूरी है. सही प्लानिंग और फोकस के साथ तैयारी करने से किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता पाई जा सकती है.
मेरठ : विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा परिणाम में असफलता मिलने के बाद अक्सर देखने को मिलता है, कि युवा तनाव से ग्रस्त हो जाते हैं. जबकि यही ऐसा समय होता है जब हम अपनी कमियों में दूर करते हुए अगली परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर अपने सपने को पूरा कर सकते हैं. यह बात लोकल-18 की टीम से खास बातचीत करते हुए यूपीएससी में तीसरे प्रयास में 809 में रैंक लाने वाली वंशिका भगत द्वारा कही गई. उन्होंने बताया कि उन्होंने भी जीवन में असफलताओं का सामना किया है. लेकिन उससे घबराई नहीं, बल्कि मजबूती के साथ अपनी तयारी की.
सेल्फ स्टडी से हासिल की सफलता
लोकल-18 से खास बातचीत करते हुए वंशिका भगत ने बताया कि यूपीएससी की तैयारी करने के लिए उन्होंने किसी भी प्रकार की कोई भी ऑफलाइन कोचिंग का कभी भी उपयोग नहीं किया है. सिर्फ सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन कंटेंट के बदौलत ही उन्होंने यह सफलता हासिल की है. उन्हें पॉलीटिकल इंटरनेशनल विषय काफी पसंद था, इसलिए उन्होंने इसी विषय का चयन किया था. वह बताती है कि यूपीएससी की तैयारी करते समय प्रतिदिन उन्होंने 6 से 8 घंटे निर्धारित किए थे. इसके साथ ही जैसे ही प्री एग्जाम की तिथि करीब आई, तो उन्होंने अपने 16 से 18 घंटे भी पढ़ाई की. मैन एग्जाम के दौरान उन्होंने 20 घंटे से अधिक की तैयारी की थी. क्योंकि इसमें लिखने की क्षमता काफी बेहतर होनी चाहिए. हालांकि वह कहती है कि यह युवाओं के खुद के ऊपर निर्भर है, कि वह कितने घंटे में पढ़ाई कर सके. लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि जब भी वह पढ़ें, तो सिर्फ उनका फोकस पढ़ाई पर ही रहे
प्लानिंग के साथ करें तैयारी
उन्होंने कहा कि जो भी युवा यूपीएससी सहित विभिन्न प्रकार की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं. ऐसे सभी युवा किसी भी परीक्षा में बैठने से पहले उसके पूरी प्लानिंग बनाएं. क्योंकि अगर वह बिना प्लानिंग के किसी परीक्षा को देते हैं. तो सिलेबस को पूरा करने में ही उलझे रहते हैं. जिससे सफलता नहीं मिलती है. ऐसे में अगर प्लानिंग के साथ अपने सिलेबस को लेकर समय सारणी निर्धारित करेंगे. तो निश्चित तौर पर वह सफलता हासिल कर सकेंगे. बताते चलें कि वंशिका भगत के माता-पिता दोनों ही शिक्षक हैं. मां जहां जूनियर हाई स्कूल में टीचर है. वहीं उनके पिता मेरठ के इंटर कॉलेज में बतौर शिक्षक युवाओं को शिक्षा अध्ययन कराते हैं. ऐसे में बेटी की उपलब्धि से दोनों ही खुश हैं. वही उनका भाई पढ़ाई कर रहा है.
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पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें