युवा किसान प्रिंस पारंपरिक खेती से हटकर लगाया अरहर, अपनाया जैविक विधि, दस गुना मिला मुनाफा

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युवा किसान प्रिंस पारंपरिक खेती से हटकर लगाया अरहर, अपनाया जैविक विधि, दस गुना मिला मुनाफा


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युवा किसान प्रिंस पारंपरिक खेती से हटकर लगाया अरहर, अपनाया जैविक विधि

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गोंडा जिले के किसान पारंपरिक खेती छोड़कर जैविक तरीके से अरहर की खेती कर रहे हैं. युवक बताते हैं कि गोंडा में अरहर की खेती खत्म ही हो गई थी लेकिन मैं 2 साल पहले अरहर की खेती की शुरुआत की और इस समय लगभग 1 एकड़ में अरहर की खेती कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि हमारे घर की खेती में किसी भी प्रकार के रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं करते हैं.

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गोंडा: उत्तर प्रदेश गोंडा जिले के किसान पारंपरिक खेती छोड़कर जैविक तरीके से अरहर की खेती कर रहे हैं. युवक बताते हैं कि गोंडा में अरहर की खेती खत्म ही हो गई थी लेकिन मैं 2 साल पहले अरहर की खेती की शुरुआत की और इस समय लगभग 1 एकड़ में अरहर की खेती कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि हमारे घर की खेती में किसी भी प्रकार के रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं करते हैं.

लोकल 18 से बातचीत के दौरान प्रगतिशील किसान प्रिंस सिंह बताते हैं कि उन्होंने ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की उसके बाद कुछ कारण बस उन्होंने पढ़ाई नहीं कर पाए और अपनी किस्मत खेती किसानों में आज मैं और वह इस समय लगभग ढाई बीघा में अरहर की खेती कर रहे हैं. जिससे सालाना लाखों का इनकम हो रहा है.

अरहर की कर रहे हैं जैविक खेती

प्रिंस बताते हैं कि अरहर की फसल एक साल में तैयार हो जाती है. प्रिंस अरहर की खेती हम जैविक विधि से कर रहे हैं. बताते हैं कि हम किसी भी रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं करते हैं केवल जैविक खाद का प्रयोग करते हैं. वह लगभग ढाई बीघा में अरहर की खेती कर रहे हैं, भविष्य में इसको और आगे बढ़ाएंगे. उन्होंने बताया कि गोंडा में आमतौर पर अरहर की खेती बंद हो गई थी. विगत 4 साल पहले हमने एक बीघा अरहर की खेती से शुरुआत की और इस समय लगभग ढाई बीघा में अरहर की खेती कर रहे हैं और हम पूरी जैविक तरीके से अरहर की खेती कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि अरहर में पानी की आवश्यकता बहुत कम होती है केवल दो बार पानी देना होता है. प्रिंस सिंह बताते हैं कि ढाई बीघा अरहर की खेती में दो से ढाई हजार रुपए की लागत लगी है. अरहर की कटाई लगभग 12 महीने बाद की जाती है और मई इसकी कटाई होगी.

अरहर के खेत में मूली बोकर कमाए हुई तगड़ी कमाई

प्रिंस सिंह बताते हैं कि एक बीघा में लगभग एक कुंटल या उससे अधिक अरहर निकलता है तो उसे अनुमान से ढाई से पौने तीन कुंतल अरहर निकालने की संभावना है. उन्होंने बताया कि अरहर की खेती से 25 से 30 हजार रुपए का इनकम आराम से हो जाएगा. किसानों को अरहर की खेती करनी चाहिए इससे उनको अच्छी दाल खाने को भी मिलेगी और इनकम भी अच्छा होगा. अरहर की खेत में हम बुवाई के कुछ समय बाद मूली की बुवाई किए थे तो हमारी लागत मूली से निकल आई है अब जो होगा पूरा इनकम ही होगा.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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