यूपी के अखिलेश ने नौकरी छोड़ शुरू की यह खेती, बदल गई जिंदगी! सिर्फ तीन महीने में हो रही छप्परफाड़ कमाई

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यूपी के अखिलेश ने नौकरी छोड़ शुरू की यह खेती, बदल गई जिंदगी! सिर्फ तीन महीने में हो रही छप्परफाड़ कमाई


मऊ: आज के दौर में जहां अधिकतर युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश में शहरों की ओर रुख करते हैं, वहीं मऊ जनपद के पकड़ी खुर्द गांव के रहने वाले आईटीआई पास युवक अखिलेश मौर्या ने बिल्कुल अलग रास्ता चुना. अखिलेश ने नौकरी के पीछे भागने के बजाय खेती को अपना भविष्य बनाया और आज ब्रोकली की खेती कर लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं. उनकी कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है.

आईटीआई के बाद खेती की ओर रुझान

अखिलेश मौर्या बताते हैं कि उन्होंने ग्रेजुएशन के बाद आईटीआई की पढ़ाई पूरी की थी. पढ़ाई खत्म होने के बाद उन्होंने भी नौकरी करने के बारे में सोचा, लेकिन मन नहीं माना. उनका झुकाव शुरू से ही खेती की ओर था. इसी दौरान उन्हें उद्यान विभाग के उद्यान अधिकारी संदीप कुमार गुप्ता से नई तकनीक और उन्नत खेती का आइडिया मिला. इसके बाद कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लेकर उन्होंने ब्रोकली की खेती शुरू करने का फैसला किया.

कम लागत, ज्यादा मुनाफा

अखिलेश ने अक्टूबर महीने में दिल्ली से ब्रोकली के बीज मंगवाए और पहले उनकी नर्सरी तैयार की. इसके बाद पौधों को खेत में रोपित किया. महज तीन महीने में फसल तैयार हो गई और दिसंबर के आखिरी सप्ताह से ही हार्वेस्टिंग शुरू हो गई. बाजार में ब्रोकली की अच्छी मांग है और यह 30 से 35 रुपये प्रति पीस के हिसाब से बिक रही है.
अखिलेश बताते हैं कि इस पूरी खेती में उनकी कुल लागत सिर्फ 1400 रुपये आई, जबकि तीन महीने में ही वह 25 हजार रुपये से ज्यादा की बिक्री कर चुके हैं. यह सिलसिला फरवरी तक चलता रहेगा.

ब्रोकली के साथ अन्य फसलों की खेती

अखिलेश सिर्फ ब्रोकली तक सीमित नहीं हैं. वह इसके साथ-साथ स्ट्रॉबेरी, लहसुन, पत्ता गोभी और ड्रैगन फ्रूट जैसी फसलों की भी खेती कर रहे हैं. उनके खेत में रोजाना दो से तीन मजदूर काम करते हैं, जिससे गांव में रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं.

ऑर्गेनिक खेती बनी पहचान

अखिलेश पूरी तरह से ऑर्गेनिक खेती करते हैं. वह घर पर ही कंपोस्ट तैयार कर जैविक खाद बनाते हैं और रासायनिक खादों से दूरी बनाए रखते हैं. यही वजह है कि उनके खेत की उपज का स्वाद अलग होता है और बाजार में उनकी फसलों की मांग ज्यादा रहती है. लोग उनकी सब्जियों को बेहतर दाम पर खरीदते हैं, क्योंकि यह सेहत के लिए सुरक्षित होती है.

युवाओं के लिए संदेश

अखिलेश मौर्या का मानना है कि अगर सही जानकारी और मेहनत के साथ खेती की जाए, तो यह नौकरी से कहीं ज्यादा लाभदायक साबित हो सकती है. वह कहते हैं कि ब्रोकली जैसी फसल न सिर्फ आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि सेहत के लिए भी लाभकारी मानी जाती है. उनकी कहानी उन युवाओं के लिए मिसाल है जो खेती को छोड़कर सिर्फ नौकरी को ही सफलता का रास्ता मानते हैं.



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