ये गाय नहीं, चलता-फिरता हैं ‘सफेद सोना’! हर किसान बनना चाहता है इनका मालिक
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Highest Milk Producing Cow News: भारत में गाय को पवित्र माना जाता है और इसे हिंदू धर्म में विशेष महत्व दिया जाता है. दुनिया में गायों की संख्या के मामले में भारत पहले नंबर पर है. वह दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश भी है. भारत के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गाय के दूध का उत्पादक संयुक्त राज्य अमेरिका है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि आजकल एक खबर सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है. बताया जा रहा है कि जूनागढ़ ऐग्रिकल्चरल यूनिवर्सिटी( JAU ) को गिर की गायों के यूरिन में सोना मिला है. चार साल की रीसर्च के बाद यह बात सामने आई है कि पवित्र गाय भी सोने का अंडा देती है. यूनिवर्सिटी की फूड टेस्टिंग लैब में 400 गिर गायों के यूरिन की जांच की गई. इस जांच में प्रति लीटर यूरिन में 3 से 10 मिली ग्राम सोने की मात्रा पाई गई. गायों के यूरिन में यह कीमती धातु आयन(गोल्ड सॉल्ट) के रूप में मिली जो घुलनशील होती है. आइए अगर आप भी गाय पालने की सोच रहे हैं तो आज हम आपको कुछ ऐसी गायों की नस्ल से रू-ब-रू कराने जा रहे हैं, जो सबसे ज्यादा दूध देने के लिए जानी जाती हैं.
गांवों में आजकल खेती के साथ-साथ साइड इनकम का सबसे तगड़ा जरिया डेयरी बिजनेस बनकर उभरा है. अगर आप भी दूध का कारोबार शुरू करने की सोच रहे हैं. तो सबसे जरूरी कदम है सही नस्ल की गाय का चुनाव करना. अक्सर लोग बिना रिसर्च के कोई भी गाय ले आते हैं और बाद में दूध कम होने या बीमारी की वजह से घाटा झेलते हैं. देसी नस्ल की गायों की डिमांड इन दिनों मार्केट में बहुत ज्यादा है क्योंकि इनका दूध सेहत के लिए बेस्ट माना जाता है और इनके रखरखाव का खर्चा भी विदेशी नस्लों के मुकाबले काफी कम होता है.

अगर आप गुजरात के गिर जंगलों से ताल्लुक रखने वाली इस नस्ल को अपने फार्म पर लाते हैं. तो समझ लीजिए कि मुनाफे की शुरुआत हो चुकी है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका शांत स्वभाव और भारी दूध उत्पादन है. गिर गाय रोजाना करीब 8 से 10 लीटर तक दूध आसानी से दे देती है. जो एक छोटे बिजनेस के लिए बहुत बढ़िया स्टार्ट है. इसके दूध की शुद्धता की वजह से लोग इसे 100 से 120 रुपये प्रति लीटर तक की कीमत पर खुशी-खुशी खरीदते हैं. इसका उभरा हुआ माथा और मुड़े हुए सींग इसकी पहचान को खास बनाते हैं. यह नस्ल बीमारियों से लड़ने में भी काफी स्ट्रॉन्ग होती है और भारतीय माहौल में खुद को बहुत जल्दी ढाल लेती है.

खैरीगढ़ गाय एक देसी नस्ल है, जो उत्तर प्रदेश के खीरी जिले के एक क्षेत्र ‘खैरीगढ़’ से नाता रखती है. यह नस्ल खास रूप से लखीमपुर खीरी के आस जिले में ज्यादा पाई जाती है. इसको खीरी, खैरागढ़ या खैरी गाय के नाम से भी जानते हैं. खास बात यह है कि यह मजबूत, मेहनती और अनुकूलनशील होती हैं. दूध उत्पादन की बात करें तो यह नस्ल करीब 300 से 500 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है.
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साहिवाल गाय भी सबसे बेहतरीन दुधारू गाय मानी जाती है. इस गाय की खासियत यह है कि यह गर्मी और बीमारियों को अच्छी तरह झेल सकती है.ये उत्तर भारत खासतौर पर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश,राजस्थान में ज्यादा पाली जाती है. साहिवाल गाय रोजाना 10-20 लीटर से ज्यादा दूध देने की क्षमता रखती है. अच्छी देखभाल पर इस गाय के दूध देने की क्षमता बढ़कर 40 से 50 लीटर हो सकती है. किसानों और डेयरी मालिकों के लिए ये गाय हमेशा से पसंदीदा रही है.

लाल कंधारी गाय छोटे और मध्यम पशुपालकों के लिए बेस्ट मानी जाती है. ऐसा माना जाता है कि इस नस्ल का विकास प्राचीन काल में कांधार के राजाओं ने चौथी सदी में किया था. ये गाय रोजाना करीब 4 से 5 लीटर औक प्रति ब्यात 600 किलोग्राम तक दूध दे सकती है. मानते हैं इसको पालन सबसे आसान होता है.

देशी नस्लों में राठी गाय को अच्छा दूध देने के लिए जाना जाता है. इसे ‘राजस्थान की कामधेनु’ तक कहा जाता है क्योंकि यह गाय ना सिर्फ दूध देती है, बल्कि कठिन मौसम में भी ढल जाती है.वैसे आमतौर पर यह प्रतिदिन 7 से 12 लीटर दूध देती है, लेकिन सही देखभाल पौष्टिक आहार दें तो यह 18 लीटर तक दूध भी दे सकती है.

दुनिया में सबसे ज़्यादा दूध देने वाली गाय होल्स्टीन है. यह काली और सफेद रंग की होती है और औसतन रोज 28 लीटर दूध देती है. दुनिया में सबसे अधिक दूध देने वाली नस्ल है. रिकॉर्ड तोड़ने वाली उत्पादन क्षमता वाली हॉल्स्टीन गायों या उनकी आनुवंशिकी को डेयरी उद्योग में भारी कीमत पर बेचा जाता है. उनकी कीमत लाखों डॉलर तक जा सकती है, खासकर अगर उनके पूर्वज उच्च-उत्पादन के रिकॉर्ड रखते हों.