ये पहाड़ी फ़ल! 40 दिन में बना देगा यूपी-बिहार के किसान को लखपति, ठंड में जेब हो जाएगी गर्म
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Strawberry Cultivation Tips : वैसे तो स्ट्रॉबेरी की खेती पहाड़ी इलाकों में होती है हालांकि, अब मैदानी क्षेत्रों में भी इसकी खेती होनी शुरू हो गई है. उत्तर प्रदेश और बिहार में बड़े पैमाने पर किसान इस फसल में रुचि दिखा रहे हैं. अगर सही तकनीक से खेती की जाए तो कुछ ही दिनों में किसान 10 लाख रुपए कमा सकते हैं.
अलीगढ़ : सर्दियों का मौसम किसानों के लिए नई संभावनाएं लेकर आता है. जहां एक ओर आलू और गेहूं की बुवाई जोरों पर है, वहीं अब कुछ ऐसी फसलें भी किसानों के बीच लोकप्रिय हो रही हैं जो कम समय में ज्यादा मुनाफा देने की क्षमता रखती हैं. इन्हीं में से एक है स्ट्रॉबेरी की खेती. स्ट्रॉबेरी एक ऐसी कमर्शियल फसल जो अब सिर्फ अमीरों तक सीमित नहीं, बल्कि आम किसान भी इसे अपनाकर अपनी आमदनी कई गुना बढ़ा रहे हैं.
अलीगढ़ मंडल उद्यान विभाग के उप निदेशक बलजीत सिंह ने बताया कि ठंड के मौसम को खेती-बाड़ी के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है. इस मौसम में रबी फसलों की बुवाई जोरों पर होती है — खेतों में आलू की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है और गेहूं की तैयारी शुरू है. ऐसे में किसानों के लिए फसलों में विविधता लाना बेहद जरूरी है, ताकि वे सीमित फसलों पर निर्भर न रहें और अपनी आय को दोगुना कर सकें. इसी दिशा में स्ट्रॉबेरी की खेती एक बेहतरीन विकल्प है. पहले इसे केवल महाराष्ट्र के महाबलेश्वर जैसे क्षेत्रों की फसल माना जाता था, लेकिन अब उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी किसान इस खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. इस समय स्ट्रॉबेरी की रोपाई का सीजन चल रहा है. इसके पौधे सामान्यतः महाराष्ट्र से मंगाए जाते हैं, हालांकि अब स्थानीय किसान भी एक-दूसरे से पौधे प्राप्त कर रहे हैं.
स्ट्रॉबेरी की खेती में खर्च और मुनाफा
स्ट्रॉबेरी के पौधों की कीमत किस्म के अनुसार ₹15 से ₹25 प्रति पौधा होती है. एक एकड़ खेत में करीब 22,000 से 25,000 पौधे लगाए जाते हैं, जिनकी दूरी लगभग 30×30 सेंटीमीटर रखी जाती है. इसकी प्रमुख प्रजातियां हैं स्वीट चार्ली, कैमरोन, विंटर डॉन और नबीला. ये पौधे नवंबर से मार्च तक फल देना शुरू कर देते हैं और औसतन 5 से 10 टन प्रति एकड़ की उपज देते हैं. इससे किसानों को प्रति एकड़ लगभग ₹5 से ₹10 लाख तक की आमदनी हो सकती है. इसका थोक मूल्य ₹200 से ₹350 प्रति किलो तक रहता है, जबकि खुदरा बाजार में इससे अधिक दाम मिलते हैं. छोटे या खराब फलों का उपयोग जूस, जैम या पाउडर बनाने में किया जा सकता है, जिससे नुकसान का कोई खतरा नहीं रहता.
तेजी से बढ़ सकता है मुनाफा
बलजीत सिंह ने बताया कि बाजार में स्ट्रॉबेरी की बिक्री को लेकर किसानों को मुश्किलें कम आती हैं, क्योंकि उत्पादन सीमित और मांग स्थायी रहती है. यदि किसान ग्रेडिंग और पैकिंग पर ध्यान दें, तो मुनाफा और भी बढ़ सकता है. हालांकि शुरुआती लागत कुछ अधिक होती है . जैसे खेत की तैयारी, पौधों की कीमत और सिंचाई व्यवस्था पर खर्च आता है लेकिन इसके मुकाबले लाभ कई गुना होता है.
सरकार देगी सब्सिडी
बलजीत सिंह ने यह भी बताया कि सरकार की एकीकृत बागवानी मिशन योजना (MIDH) के तहत किसानों को स्ट्रॉबेरी की खेती पर अनुदान (सब्सिडी) भी मिलता है. उन्होंने किसानों से अपील की कि इस सर्दी, वे पारंपरिक फसलों के साथ स्ट्रॉबेरी जैसी एग्ज़ोटिक और कमर्शियल फसलों को भी अपनाएं. यह न केवल उनकी आमदनी बढ़ाएगा बल्कि खेती में नई दिशा भी मिलेगी.
मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु…और पढ़ें
मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु… और पढ़ें