रक्षा निर्यात में कानपुर की धमाकेदार एंट्री! वियतनाम ऑर्डर के बाद कई देश लाइन
Last Updated:
कानपुर की ऐतिहासिक ऑर्डिनेंस पैराशूट फैक्ट्री, जिसे अब ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड के नाम से जाना जाता है, आज भारत के रक्षा निर्यात की मजबूत पहचान बन चुकी है. कभी सिर्फ भारतीय सेना और वायुसेना की जरूरतें पूरी करने वाली यह यूनिट अब वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया और कई अफ्रीकी देशों तक अपने पैराशूट भेज रही है. हाल ही में सुखोई लड़ाकू विमानों के लिए मिले बड़े ऑर्डर ने कानपुर को ग्लोबल डिफेंस मैप पर और मजबूती से स्थापित कर दिया है.
कानपुर. कानपुर की ऐतिहासिक ऑर्डिनेंस पैराशूट फैक्ट्री, जिसे अब ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड के नाम से जाना जाता है, आज भारत के रक्षा निर्यात का अहम केंद्र बन चुकी है. कभी यह यूनिट सिर्फ भारतीय सेना और वायुसेना की जरूरतें पूरी करती थी, लेकिन अब इसके पैराशूट विदेशों तक पहुंच रहे हैं. इंडोनेशिया, मलेशिया, वियतनाम और कई अफ्रीकी देशों में यहां बने पैराशूट की सप्लाई की जा रही है. इजिप्ट समेत कुछ अन्य देशों से भी बड़े ऑर्डर को लेकर बातचीत जारी है.
वियतनाम से बड़ा ऑर्डर, सुखोई विमानों के लिए सप्लाई
हाल ही में वियतनाम की ओर से लड़ाकू विमानों के लिए ब्रेक पैराशूट और पायलट पैराशूट का बड़ा ऑर्डर मिला है. ये पैराशूट फाइटर जेट की लैंडिंग के दौरान उसकी रफ्तार कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं. रक्षा विशेषज्ञ इसे भारत की गुणवत्ता और तकनीक पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय भरोसे की मिसाल मानते हैं. फैक्ट्री में मानव-वाहक पैराशूट, कार्गो पैराशूट, ब्रेक पैराशूट और अनमैंड सिस्टम के लिए विशेष पैराशूट तैयार किए जाते हैं. सभी उत्पाद अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप बनाए जाते हैं.
इंडोनेशिया, मलेशिया और अफ्रीका में बढ़ती मांग
कानपुर से तैयार पैराशूट पहले ही इंडोनेशिया और मलेशिया को भेजे जा चुके हैं. कई अफ्रीकी देशों ने भी भारतीय पैराशूट में गहरी रुचि दिखाई है. सूत्रों के अनुसार, कुछ नए देश परीक्षण और तकनीकी मूल्यांकन की प्रक्रिया में हैं. संभावना है कि जल्द ही और निर्यात समझौते किए जाएंगे. बताया जा रहा है कि इजिप्ट के साथ भी बड़े स्तर पर बातचीत जारी है. यदि समझौता तय होता है, तो वहां भी जल्द सप्लाई शुरू हो सकती है. दक्षिण-पूर्व एशिया और पश्चिम एशिया के कुछ देश भी भारतीय पैराशूट खरीदने की तैयारी में हैं.
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूत कदम
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की नीति का असर अब साफ नजर आ रहा है. कानपुर की यह यूनिट न सिर्फ देश की तीनों सेनाओं की जरूरतें पूरी कर रही है, बल्कि विदेशी मुद्रा अर्जित कर अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही है. अधिकारियों के मुताबिक, निर्यात बढ़ने के साथ उत्पादन क्षमता का विस्तार किया जा रहा है और आधुनिक तकनीकों को शामिल किया जा रहा है. भविष्य में ड्रोन सिस्टम और एडवांस एयर डिलीवरी सिस्टम के लिए भी विशेष पैराशूट विकसित किए जा रहे हैं.
एशिया की बड़ी सप्लायर बनने की ओर
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गुणवत्ता और समयबद्ध सप्लाई बनी रही, तो आने वाले वर्षों में कानपुर की यह फैक्ट्री एशिया की प्रमुख पैराशूट सप्लायर बन सकती है. कई देशों के साथ बातचीत अंतिम चरण में है और नए बाजार खुलने की पूरी संभावना है. फैक्ट्री से जुड़े मोहम्मद अनस के अनुसार, “आज हम ग्लोबल स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना चुके हैं. इंडोनेशिया, मलेशिया और कई अफ्रीकी देश हमारे पैराशूट इस्तेमाल कर रहे हैं. आने वाले कुछ सालों में और भी देश भारतीय पैराशूट का उपयोग करते नजर आएंगे.
About the Author
पिछले 4 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हूं और फिलहाल News18 में कार्यरत हूं. इससे पहले एक MNC में भी काम कर चुकी हूं. यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की बीट कवर करती हूं. खबरों के साथ-साथ मुझे…और पढ़ें